कुरान - 6:158 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

158
هَلۡ يَنظُرُونَ إِلَّآ أَن تَأۡتِيَهُمُ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ أَوۡ يَأۡتِيَ رَبُّكَ أَوۡ يَأۡتِيَ بَعۡضُ ءَايَٰتِ رَبِّكَۗ يَوۡمَ يَأۡتِي بَعۡضُ ءَايَٰتِ رَبِّكَ لَا يَنفَعُ نَفۡسًا إِيمَٰنُهَا لَمۡ تَكُنۡ ءَامَنَتۡ مِن قَبۡلُ أَوۡ كَسَبَتۡ فِيٓ إِيمَٰنِهَا خَيۡرٗاۗ قُلِ ٱنتَظِرُوٓاْ إِنَّا مُنتَظِرُونَ

Transliteration: (Hal yanzuroona illaaa an ta'tiyahumul malaaa'ikatu aw ya'tiya Rabbuka aw ya'tiya ba'du Aayaati Rabbik; yawma ya'tee ba'du Aayaati Rabbika laa yanfa'u nafsan eemaanuhaa lam takun aamanat min qablu aw kasabat feee eemaanihaa khairaa; qulin tazirooo innaa muntaziroon)

क्या ये लोग इंतज़ार कर रहे हैं कि फ़रिश्ते इनके पास आ जाएँ, या तुम्हारे रब का अज़ाब [374] आ पहुँचे, या तुम्हारे रब की कोई निशानी आ जाए? जिस दिन तुम्हारे रब की वह निशानी आ जाएगी, उस दिन किसी जान को उसका ईमान फ़ायदा नहीं देगा, जिसने पहले ईमान न लाया हो, या जिसने अपने ईमान में कोई भलाई हासिल न की हो [376]। तो कह दीजिए: "इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार करने वालों में हैं" [377]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 158 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 158 की तफ़्सीर

✅ [374] फ़रिश्ते और क़यामत की निशानियाँ

  • यहाँ “फ़रिश्ते” से मुराद मौत का फ़रिश्ता है, जो रूह क़ब्ज़ करने आता है।
  • “तुम्हारे रब की निशानी” से मुराद है सूरज का पश्चिम से निकलना, जो क़यामत की सबसे बड़ी निशानियों में से है।
  • उस वक़्त ईमान क़ुबूल नहीं होगा, क्योंकि अब ग़ैब पर ईमान लाने का इम्तिहान ख़त्म हो जाएगा और सब कुछ सामने आ जाएगा।

✅ [375] ईमान का नाक़ाबिल-ए-क़ुबूल होना

  • अगर कोई उस वक़्त तक कुफ़्र पर रहा, तो उसके बाद ईमान लाना उसे फ़ायदा नहीं देगा।
  • ईमान सिर्फ़ इम्तिहान की मोहलत के दौरान ही क़ुबूल है, जब तक हक़ पूरी तरह ग़ैब है।
  • हदीस में आता है कि उस निशानी के बाद बच्चे पैदा नहीं होंगे, यानी नई नस्लों को इम्तिहान का मौक़ा नहीं मिलेगा।

✅ [376] ईमान के साथ अच्छे अमल ज़रूरी

  • जो पहले से ईमान लाए लेकिन अच्छे अमल नहीं किए, उनके लिए भी उस वक़्त ईमान फ़ायदा नहीं देगा।
  • इस आयत से वाज़ेह हुआ कि सिर्फ़ ईमान काफी नहीं, बल्कि ईमान + नेक अमल ज़रूरी हैं।
  • उस वक़्त तौबा, नमाज़, सदक़ा — किसी चीज़ का क़ुबूल होना मुमकिन नहीं होगा।

✅ [377] आपसी चेतावनी – “इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार कर रहे हैं”

  • रसूल ﷺ को हुक्म दिया गया कि कुफ़्फ़ार से कहें: “तुम इंतज़ार करो, हम भी इंतज़ार कर रहे हैं।”
  • मतलब: हम अल्लाह के वादे पर यक़ीन रखते हैं और जल्द ही हक़ वाज़ेह होकर रहेगा।
  • नतीजा यह होगा कि मोमिनीन कामयाब होंगे और काफ़िर तबाह होंगे।

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