कुरान - 6:160 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

160
مَن جَآءَ بِٱلۡحَسَنَةِ فَلَهُۥ عَشۡرُ أَمۡثَالِهَاۖ وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَلَا يُجۡزَىٰٓ إِلَّا مِثۡلَهَا وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ

Transliteration: (Man jaaa'a bilhasanati falahoo 'ashru amsaalihaa wa man jaaa'a bissaiyi'ati falaa yujzaaa illaa mislahaa wa hum laa yuzlamoon)

आप कह दीजिए: बेशक, मेरे रब ने मुझे सीधा रास्ता दिखाया है [384] — दीन-ए-क़ायम (सच्चा दीन), हज़रत इबराहीम का तरीक़ा, जो हर झूठ से किनारे रहने वाले थे और मुषरिक न थे [385]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 160 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 160 की तफ़्सीर

✅ [384] सीधा रास्ता दिखाना

  • नबी ﷺ को अल्लाह ने सीधे अपनी तरफ़ से हिदायत दी।
  • यह रास्ता किसी फ़लसफ़े, क़ियास या समाजी रस्मों पर नहीं, बल्कि वही (इल्हाम) पर आधारित है।
  • इसमें तौहीद (एक अल्लाह की इबादत), नेक अमल और ख़ालिस बंदगी शामिल है।
  • यही रास्ता नजात का है, जो हर तरह की बिदअत, ग़ल्ती और ग़ुलू से पाक है।

✅ [385] हज़रत इबराहीम का दीन

  • कुरआन ने हज़रत इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के तरीक़े की तरफ़ तवज्जो दिलाई।
  • वह हर झूठ और शिर्क से पाक, सिर्फ़ अल्लाह के लिए मुतअल्लिक़ थे।
  • नबी ﷺ को हुक्म दिया गया कि उसी ख़ालिस तौहीद वाले तरीक़े की पैरवी करें।
  • क़ुरैश, जो अपने को इबराहीम का मानने वाला कहते थे, उन्हें तंबीह की गई कि असल इत्तिबा तभी है जब शिर्क छोड़कर सिर्फ़ अल्लाह की इबादत की जाए।

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