कुरान - 6:162 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

162
قُلۡ إِنَّ صَلَاتِي وَنُسُكِي وَمَحۡيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Qul inna Salaatee wa nusukee wa mahyaaya wa mamaatee lillaahi Rabbil 'aalameen)

आप कह दीजिए: बेशक, मेरी नमाज़ और मेरी क़ुर्बानी [386], और मेरी जिंदगी और मेरी मौत सब अल्लाह ही के लिए हैं, जो सारे जहानों का रब है [387]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 162 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 162 की तफ़्सीर

✅ [386] इबादत में तरतीब

  • इस आयत में नमाज़ का ज़िक्र क़ुर्बानी से पहले आया, ताकि यह वाज़ेह हो कि जिस्मानी इबादत (नमाज़), माली इबादत (क़ुर्बानी) से अफ़ज़ल है।
  • नमाज़ दिल की ख़ालिस बंदगी और अल्लाह की याद का सबसे बड़ा इज़्हार है।
  • क़ुर्बानी और दूसरे माली अमल भी अहम हैं, मगर अस्ल मक़सद ख़ुदा के सामने ताबेदारी और इख़लास है।

✅ [387] जिंदगी और मौत अल्लाह के लिए

  • नबी ﷺ की पूरी जिंदगी और मौत अल्लाह के लिए वक़्फ़ थी।
  • आपकी ज़िंदगी याद-ए-इलाही, तालीम और दीन की तबलीग़ में गुज़री।
  • आपकी मौत भी अल्लाह की रज़ा के ताबे थी, यानी आप हर हाल में अल्लाह के लिए फ़ना हुए।
  • इस आयत से मुसलमानों को सबक़ मिलता है कि उनका जीना और मरना अल्लाह ही के लिए होना चाहिए।

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