कुरान - 6:163 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

163
لَا شَرِيكَ لَهُۥۖ وَبِذَٰلِكَ أُمِرۡتُ وَأَنَا۠ أَوَّلُ ٱلۡمُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Laa shareeka lahoo wa bizaalika umirtu wa ana awwalul muslimeen)

उसका कोई साझी नहीं है, और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है, और मैं (मुहम्मद ﷺ) सबसे पहला मुसलमान हूँ [388]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 163 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 163 की तफ़्सीर

✅ [388] नबी ﷺ की सब से बुलंद ताबेदारी

  • इस आयत में तौहीद (अल्लाह की यकतानियत) को दोहराया गया है कि अल्लाह का न नसीब, न शरीक किसी भी सूरत में है—न उसकी ज़ात में, न उसकी रूबूबियत में, और न उसकी इबादत में।
  • नबी ﷺ का इज़्हार है कि यही अस्ल हुक्म मुझे दिया गया है।
  • "मैं सबसे पहला मुसलमान हूँ" का मतलब यह नहीं कि आप दुनियावी लिहाज़ से पहले मुसलमान हैं, बल्कि यह कि आप ﷺ सबसे आला दर्जे के मुसलमान, सबसे मुकम्मल ताबेदार और सब से पहले अल्लाह के हुक्म के सामने झुकने वाले हैं।
  • आलम-ए-अरवाह (रूहों की दुनिया) में जब अल्लाह ने फ़रमाया: "क्या मैं तुम्हारा रब नहीं हूँ?", तो सबसे पहले नबी मुहम्मद ﷺ ने "हाँ" कहा।
  • इससे साबित हुआ कि नबी ﷺ का रूहानी मक़ाम सब पर फ़ज़ीलत वाला है, और आप उम्मत व तमाम मख़लूक़ात के सरदार और पेशवा हैं।

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