कुरान - 6:164 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

164
قُلۡ أَغَيۡرَ ٱللَّهِ أَبۡغِي رَبّٗا وَهُوَ رَبُّ كُلِّ شَيۡءٖۚ وَلَا تَكۡسِبُ كُلُّ نَفۡسٍ إِلَّا عَلَيۡهَاۚ وَلَا تَزِرُ وَازِرَةٞ وِزۡرَ أُخۡرَىٰۚ ثُمَّ إِلَىٰ رَبِّكُم مَّرۡجِعُكُمۡ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ فِيهِ تَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Qul aghairal laahi abghee Rabbanw wa Huwa Rabbu kulli shaiyy'; wa laa taksibu kullu nafsin illaa 'alaihaa; wa laa taziru waaziratunw wizra ukhraa; summa ilaa Rabbikum marji'ukum fa yunabbi'ukum bimaa kuntum feehi takhtalifoon)

कह दीजिए: "क्या मैं अल्लाह के सिवा कोई और रब तलाश करूँ [389], जबकि वही हर चीज़ का रब है? और जो कोई कमाता है, तो वह उसी पर है [390]। कोई बोझ उठाने वाला दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा [391]। फिर तुम सबको अपने रब की तरफ लौटना है। वही तुम्हें बता देगा, जिस बारे में तुम इख़्तिलाफ़ किया करते थे [392]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 164 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 164 की तफ़्सीर

✅ [389] हक़ीक़ी रब सिर्फ अल्लाह

  • यह आयत उस वक़्त नाज़िल हुई जब वलीद बिन मुगीरा ने नबी ﷺ से कहा कि अपने बाप-दादाओं का तरीक़ा अपनाओ और उनका गुनाह मैं उठा लूँगा।
  • अल्लाह ने नबी ﷺ को हुक्म दिया कि साफ़ कह दो: "रब सिर्फ अल्लाह है, उसके अलावा किसी को रब बनाना नामुमकिन है।"
  • इससे साबित हुआ कि हिदायत कभी भी किसी दुनियावी फायदा या दबाव की वजह से छोड़ी नहीं जा सकती।

✅ [390] आमाल की ज़िम्मेदारी

  • हर शख्स अपने अमल का खुद ज़िम्मेदार है।
  • नेकियाँ करने पर उसका सवाब मिलेगा, गुनाह करने पर उसका अज़ाब उसी को मिलेगा।
  • किसी और पर अपने गुनाह डालने का हक़़ किसी को नहीं।
  • हाँ, नेक आमाल जैसे दुआ, सदक़ा जारिया, इल्म का सवाब दूसरों तक पहुँच सकता है।

✅ [391] गुनाह का बोझ कोई और नहीं उठाएगा

  • किसी का गुनाह किसी और पर नहीं डाला जाएगा।
  • सूरा अल-अनक़बूत (29:13) में जो आया है: "वो अपने बोझ उठाएँगे और दूसरों के बोझ भी अपने साथ," उसका मतलब है कि जो लोग दूसरों को गुमराह करेंगे, उनके गुनाह का हिस्सा भी उन्हीं के नाम लिखा जाएगा।
  • यानी गुनाह का हिस्सा अपनी कोशिश से कमाना होगा, वरना बेमतलब किसी पर लादा नहीं जाएगा।

✅ [392] आखिरत में फ़ैसला

  • आखिरकार हर एक को अपने रब की तरफ लौटना है।
  • दुनिया में जिन बातों पर लोग इख़्तिलाफ़ करते हैं—अक़ीदा, हलाल-हराम, सच-झूठ—उनका अंतिम फ़ैसला अल्लाह ही करेगा।
  • यही क़यामत के दिन का असली इनसाफ़ है।

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