कुरान - 6:159 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

159
إِنَّ ٱلَّذِينَ فَرَّقُواْ دِينَهُمۡ وَكَانُواْ شِيَعٗا لَّسۡتَ مِنۡهُمۡ فِي شَيۡءٍۚ إِنَّمَآ أَمۡرُهُمۡ إِلَى ٱللَّهِ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا كَانُواْ يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Innal lazeena farraqoo deenahum wa kaanoo shiya'allasta minhum fee shaiyy'; innamaaa amruhum ilallaahi summa yunabbi'uhum bimaa kaanoo yaf'aloon)

बेशक, जिन लोगों ने अपने दीन में जुदा-जुदा रास्ते बना लिए [378] और अलग-अलग फ़िर्क़े हो गए [379], ऐ हबीब ﷺ! आपका उनसे कोई ताल्लुक़ नहीं है [380]। अल्लाह ही उन्हें बताएगा कि वे क्या किया करते थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 159 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 159 की तफ़्सीर

✅ [378] दीन में नए रास्ते ईजाद करना

  • इससे मुराद वे लोग हैं जिन्होंने नबी ﷺ की सीरत और हिदायत छोड़कर दीन में बिदअत (नई बातें) शामिल कर लीं।
  • उन्होंने सीधा रास्ता छोड़कर अपनी नफ़्सानी ख्वाहिशात और समाजी रस्मों को दीन बना लिया।
  • यह अल्लाह की हिदायत से रुख़सती और गुमराही का सबब है।

✅ [379] अलग-अलग फ़िर्क़ों में बँट जाना

  • जिस तरह यहूद 71 फ़िर्क़ों में और नसारा 72 फ़िर्क़ों में बँटे, उसी तरह उम्मते-मुस्लिम भी 73 फ़िर्क़ों में बँट जाएगी।
  • हदीस में आया है कि इनमें से सिर्फ़ एक जमाअत नजात पाएगी — और वह वही होगी जो नबी ﷺ और सहाबा की राह पर क़ायम रहेगी।
  • बाक़ी सब गुमराह माने जाएँगे, क्योंकि उन्होंने असल तालीमात से कटा हुआ रास्ता अपनाया।

✅ [380] नबी ﷺ का फ़िर्क़ापरस्तों से बेज़ार होना

  • नबी ﷺ का उन लोगों से कोई ताल्लुक़ नहीं जो दीन को टुकड़े-टुकड़े कर दें।
  • आपको उनके अमल का जवाबदेह नहीं ठहराया गया।
  • क़यामत के दिन अल्लाह ही उन्हें उनके असल अमल दिखाएगा और उनका हिसाब लेगा।
  • इससे वाज़ेह होता है कि हिदायत सिर्फ़ नबवी तालीमात में है, और इससे हटकर हर रास्ता जवाबदेही और सज़ा का सबब बनेगा।

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