Transliteration: (Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa summunw wa bukmun fiz zulumaat; mai yasha il laahu yudlillhu; wa mai yashaa yaj'alhu 'alaa Siraatim Mustaqeem)
इस आयत में काफ़िरों को उन लोगों की तरह बताया गया है जो बहरे और गूंगे हैं, और गहरे अंधकार में फंसे हुए हैं। अगर कोई व्यक्ति अंधेरे में डूबा हुआ हो, तो उसकी दृष्टि भी काम नहीं करती। वह ना तो मदद के लिए पुकार सकता है, ना ही हिदायत की आवाज़ सुन सकता है। यह रूपक उन लोगों की हालत को दर्शाता है जो अल्लाह की निशानियों को झुटलाते हैं — वे सचाई के हर रास्ते से कटे हुए होते हैं, ना अपनी अक़्ल से फ़ायदा उठा सकते हैं, और ना किसी और की हिदायत से लाभ ले सकते हैं।
अल्लाह जिसे चाहता है, सीधी राह की हिदायत देता है, और यह सीधा रास्ता वही है जो पैग़म्बरों, औलियाओं और नेक बंदों का रास्ता है। यही वह रास्ता है जिस पर अल्लाह का फ़ज़्ल और इनाम है, जैसा कि सूरा अल-फातिहा में कहा गया: हमें सीधा रास्ता दिखा, उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम किया (1:6)। जो गुट या फिरका औलियाओं से खाली होता है, वह इस इलाही रहनुमाई वाले रास्ते से कटा हुआ होता है, क्योंकि अल्लाह के प्यारे बंदों की मौजूदगी सच्ची हिदायत की निशानी है।
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