Transliteration: (Faaliqul isbaahi wa ja'alal laila sakananw wash shamsa walqamara husbaanaa; zaalika taqdeerul 'Azeezil 'Aleem)
यह आयत उस समय की ओर इशारा करती है जब पूरब से पहला उजाला प्रकट होता है, मानो अंधकार को एक धागा चीर रहा हो। यह प्राकृतिक घटना अल्लाह की शक्ति की निशानी है। रूहानी तौर पर यह इस बात का प्रतीक है कि अल्लाह कुफ्र के अंधकार को चीरकर पैग़म्बरी की रौशनी फैलाता है और इंसानों को वह़ी के ज़रिये हिदायत देता है।
अल्लाह ने चाँद को चाँद्र मास और सूरज को सौर गणना के लिए बनाया। चाँद के ज़रिये रोज़ा और हज जैसे इस्लामी इबादतों के समय का निर्धारण होता है, जबकि सूरज से पाँचों नमाज़ों के वक़्त तय होते हैं। ये खगोलीय पिंड अल्लाह के आदेश की सटीकता और शक्ति के दर्पण हैं।
यह आयत दर्शाती है कि ब्रह्मांड का गणितीय और व्यवस्थित क्रम अल्लाह की हिकमत और क़ुदरत का सबूत है। आसमान और ज़मीन का यह तालमेल उसके सर्वज्ञान का प्रकट रूप है। गणित एक सम्मानित विज्ञान है, जो इलाही रचना की व्यवस्थित सुंदरता को उजागर करता है।
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