कुरान - 6:97 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

97
وَهُوَ ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُمُ ٱلنُّجُومَ لِتَهۡتَدُواْ بِهَا فِي ظُلُمَٰتِ ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِۗ قَدۡ فَصَّلۡنَا ٱلۡأٓيَٰتِ لِقَوۡمٖ يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa Huwal lazee ja'ala lakumun nujooma litahtadoo bihaa fee zulumaatil barri walbahr; qad fassalnal Aayaati liqawminy ya'lamoon)

और वही है जिसने तुम्हारे लिए सितारे बनाए, ताकि तुम ज़मीन और समुंदर के अँधेरों [209] में रास्ता पा सको। हमने ज्ञान रखने वाले लोगों [210] के लिए निशानियों को विस्तार से बयान किया है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 97 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम — आयत 97

✅ [209] सितारे — सफ़र और रूहानी रहनुमा

अल्लाह ने सितारों को इस तरह बनाया कि वे रात के अँधेरों में ज़मीनी और समुद्री सफ़र करने वालों के लिए रास्ता बताने का ज़रिया बनें। वे दिशा और समय के निर्धारण में मदद करते हैं। रूहानी तौर पर, सितारे हज़रत नबी ﷺ के मुबारक सहाबा की मिसाल भी हैं, जो ईमान के मामलों में रोशनी और रहनुमाई देने वाले सितारों की तरह हैं।

✅ [210] असली इल्म — अल्लाह की निशानियों की पहचान

यह आयत बताती है कि सारी कुदरती निशानियाँ उन लोगों की रहनुमाई के लिए हैं जिनके पास असली इल्म है—यानी ऐसा इल्म जो इंसान को अल्लाह की पहचान और उसकी तरफ़ क़रीब कर दे। अगर इल्म इंसान को अल्लाह से दूर करे, तो वह इल्म नहीं बल्कि जहालत का पर्दा है।

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