कुरान - 21:26 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
وَقَالُواْ ٱتَّخَذَ ٱلرَّحۡمَٰنُ وَلَدٗاۗ سُبۡحَٰنَهُۥۚ بَلۡ عِبَادٞ مُّكۡرَمُونَ

Transliteration: (Wa qaalut takhazar Rahmaanu waladaa; Subhaanahu bal 'ibaadum mukramoon)

26. और उन्होंने कहा कि 'रहमान ने औलाद बना ली है!' वह पाक है! बल्कि वे (फ़रिश्ते तो उसके) बा-इज़्ज़त बन्दे हैं [39]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 26 की तफ़सीर

"और उन्होंने कहा कि 'रहमान ने औलाद बना ली है!' वह पाक है! बल्कि वे (फ़रिश्ते तो उसके) बा-इज़्ज़त बन्दे हैं [39];"

[39] अल्लाह की औलाद होने की नफ़ी और मुक़र्रब बंदों का एहतिराम

अरब के मुशरिक (जैसे बनी ख़ुज़ाआ) फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहते थे, और ईसाइयों ने हज़रत ईसा को ख़ुदा का बेटा क़रार दिया। अल्लाह तआला ने इस बातिल अक़ीदे की सख्ती से तर्दीद फ़रमाई कि वह औलाद, बीवी और तमाम जिस्मानी हाजतों से पाक व मुनज़्ज़ह है।

इसके साथ ही अल्लाह तआला ने यह भी सिखाया कि बातिल अक़ीदों का रद्द करते हुए मुक़र्रब हस्तियों की तौहीन न की जाए, बल्कि उनका मर्तबा वाज़ेह किया जाए कि फ़रिश्ते और अंबिया अल्लाह की औलाद नहीं, बल्कि उसके निहायत मुकर्रम और बा-इज़्ज़त बन्दे हैं।

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