Transliteration: (Laa yasbiqoonahoo bil qawli wa hum bi amrihee ya'maloon)
"वे बात करने में उससे पहल नहीं करते, और वे उसके हुक्म पर ही अमल करते हैं [40] ।"
यहाँ फ़रिश्तों के कामिल अदब और इताअत का बयान है:
वे अल्लाह के हुज़ूर बे-इजाज़त कलाम में पहल नहीं करते, बल्कि हुक्मे इलाही के मुंतज़िर रहते हैं।
वे हर मामले में अल्लाह के हुक्म के पाबंद हैं और कभी उसकी नाफ़रमानी नहीं करते। इससे साबित हुआ कि फ़रिश्ते मासूम हैं, जैसा कि सूरह अत्तहरीम में फ़रमाया: "वे अल्लाह के हुक्म की नाफ़रमानी नहीं करते और वही करते हैं जिसका उन्हें हुक्म दिया जाता है।"
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