कुरान - 21:27 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
لَا يَسۡبِقُونَهُۥ بِٱلۡقَوۡلِ وَهُم بِأَمۡرِهِۦ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Laa yasbiqoonahoo bil qawli wa hum bi amrihee ya'maloon)

27. वे बात करने में उससे पहल नहीं करते, और वे उसके हुक्म पर ही अमल करते हैं [40] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 27 की तफ़सीर

"वे बात करने में उससे पहल नहीं करते, और वे उसके हुक्म पर ही अमल करते हैं [40] ।"

[40] फ़रिश्तों की कामिल फ़रमाँबरदारी और इस्मत

यहाँ फ़रिश्तों के कामिल अदब और इताअत का बयान है:

  • वे अल्लाह के हुज़ूर बे-इजाज़त कलाम में पहल नहीं करते, बल्कि हुक्मे इलाही के मुंतज़िर रहते हैं।

  • वे हर मामले में अल्लाह के हुक्म के पाबंद हैं और कभी उसकी नाफ़रमानी नहीं करते। इससे साबित हुआ कि फ़रिश्ते मासूम हैं, जैसा कि सूरह अत्तहरीम में फ़रमाया: "वे अल्लाह के हुक्म की नाफ़रमानी नहीं करते और वही करते हैं जिसका उन्हें हुक्म दिया जाता है।"

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now