Transliteration: (Wa mai yaqul minhum inneee ilaahum min doonihee fazaalika najzeehi Jahannam; kazaalika najziz zaalimeen (section 2))
"और उनमें से जो कोई यह कह दे [43] कि 'मैं उसके सिवा माबूद हूँ', तो हम उसे जहन्नम की सज़ा देंगे; इसी तरह हम ज़ालिमों को बदला दिया करते हैं।"
फ़रिश्तों से ख़ुदाई के दावे का कोई तसव्वुर ही नहीं हो सकता क्योंकि वे मासूम हैं; यह फ़रमान बतौर-ए-फ़र्ज़ व तक़दीर बयान फ़रमाया गया है ताकि हुक्म की सख्ती ज़ाहिर हो। बाअज़ मुफ़स्सिरीन के नज़दीक यहाँ इबलीस मुराद है जो फ़रिश्तों के दरमियान रहता था और उसने अपनी सरकशी से ख़ुद को माबूद बनाने की कोशिश की।
जो कोई भी ख़ुदाई या इबादत का दावा करे, उसका ठिकाना सिर्फ़ और सिर्फ़ जहन्नम है क्योंकि शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म है।
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