Transliteration: (Awalam yaral lazeena kafarooo annas samaawaati wal arda kaanataa ratqan fafataqnaa humaa wa ja'alnaa minal maaa'i kulla shai'in haiyin afalaa yu'minoon)
"क्या काफ़िरों ने इस बात पर ग़ौर नहीं किया कि आसमान और ज़मीन दोनों आपस में मिले हुए (जुड़े हुए) थे, तो हमने उन्हें फाड़कर अलग-अलग कर दिया [44]; और हमने पानी से हर ज़िन्दा चीज़ को बनाया [45]; तो क्या फिर भी वे ईमान नहीं लाते?"
इस आयत में तख़लीक़े कायनात का अज़ीम राज़ बयान फ़रमाया गया है:
पहला मफ़हूम: आसमान और ज़मीन आपस में जुड़े हुए थे, फिर अल्लाह ने अपनी क़ुदरत से आसमान को बुलंद किया और ज़मीन को बिछा दिया, और दोनों के दरमियान फ़ज़ा क़ाइम की।
दूसरा मफ़हूम: आसमान बंद था यानी बारिश नहीं होती थी, अल्लाह ने बारिश के लिए उसे खोला; और ज़मीन बंद थी यानी नबातात नहीं उगती थीं, अल्लाह ने सब्ज़े और दरख़्तों के लिए उसे चीर दिया।
अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि तमाम जानदारों की पैदाइश पानी से हुई है:
इंसान और जानवरों की तख़लीक़ नुत्फ़े (पानी) से हुई है।
पौधे, दरख़्त और नबातात की हयात पानी ही से क़ाइम है। आधुनिक साइंस ने भी साबित किया है कि हर ज़िन्दा ख़लिए (cell) का बुनियादी जुज़ पानी (protoplasm) है।
जो रब पानी जैसी बे-जान चीज़ से हयात के ऐसे अजूबे पैदा कर सकता है, वही रब क़ियामत के दिन मुर्दों को दोबारा ज़िन्दा करने पर क़ादिर है।
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