कुरान - 21:32 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
وَجَعَلۡنَا ٱلسَّمَآءَ سَقۡفٗا مَّحۡفُوظٗاۖ وَهُمۡ عَنۡ ءَايَٰتِهَا مُعۡرِضُونَ

Transliteration: (Wa ja'alnas samaaa'a saqfam mahfoozanw wa hum 'an Aayaatihaa mu'ridoon)

32. और हमने आसमान को एक महफ़ूज़ छत बनाया [47]; मगर वे उसकी निशानियों से मुंह मोड़े हुए हैं [48] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 32 की तफ़सीर

"और हमने आसमान को एक महफ़ूज़ छत बनाया [47]; मगर वे उसकी निशानियों से मुंह मोड़े हुए हैं [48] ।"

[47] आसमान: बग़ैर सुतूनों की महफ़ूज़ छत

अल्लाह तआला ने आसमान को ज़मीन के ऊपर एक ऐसी छत बनाया जो बग़ैर किसी ज़ाहिरी सुतून के क़ाइम है और हर तरह के गिरने या फटने से महफ़ूज़ है। यह आसमान ज़मीन को शहाब-ए-साक़िब, ख़लाई ख़तरों और मुज़िर शुआओं से बचाने वाली एक ढाल की मानिंद है।

[48] निशानियात-ए-इलाही से ग़फ़लत

आसमान में सूरज, चाँद, सितारे, बुर्ज और गर्दिश की बेशुमार निशानियाँ मौजूद हैं जो ख़ुदा की तौहीद और क़ुदरत की गवाही देती हैं, मगर मुशरिक़ीन इन पर तवज्जोह देने के बजाए ग़फ़लत में मुंह फेरे रहते हैं।

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