Transliteration: (Wa ja'alnas samaaa'a saqfam mahfoozanw wa hum 'an Aayaatihaa mu'ridoon)
"और हमने आसमान को एक महफ़ूज़ छत बनाया [47]; मगर वे उसकी निशानियों से मुंह मोड़े हुए हैं [48] ।"
अल्लाह तआला ने आसमान को ज़मीन के ऊपर एक ऐसी छत बनाया जो बग़ैर किसी ज़ाहिरी सुतून के क़ाइम है और हर तरह के गिरने या फटने से महफ़ूज़ है। यह आसमान ज़मीन को शहाब-ए-साक़िब, ख़लाई ख़तरों और मुज़िर शुआओं से बचाने वाली एक ढाल की मानिंद है।
आसमान में सूरज, चाँद, सितारे, बुर्ज और गर्दिश की बेशुमार निशानियाँ मौजूद हैं जो ख़ुदा की तौहीद और क़ुदरत की गवाही देती हैं, मगर मुशरिक़ीन इन पर तवज्जोह देने के बजाए ग़फ़लत में मुंह फेरे रहते हैं।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat