Transliteration: (Wa Huwal lazee khalaqal laila wannahaara washshamsa wal qamara kullun fee falakiny yasbahoon)
"और वही है जिसने रात और दिन को पैदा किया [49] और सूरज और चाँद को; सब के सब एक-एक मदार (ऑर्बिट) में तैर रहे हैं [50] ।"
अल्लाह तआला ने रात को सुकून व आराम का ज़रिया बनाया और दिन को मआश व मेहनत का वक़्त ठहराया। इस्लामी शरीअत में रात को दिन पर मुक़द्दम रखा गया है, चुनांचे इस्लामी तारीख़ सूरज डूबने के बाद शुरू होती है।
क़ुरआने मजीद ने सूरज, चाँद और सय्यारों की हरकत के लिए 'यसबहून' (तैरते हैं) का लफ़्ज़ इस्तेमाल फ़रमाया। इसका मतलब यह है कि ये तमाम अजराम-ए-फ़लकी ख़ला (space) में अपने-अपने तयशुदा मदार (orbit) में निहायत रवानी और तवाज़ुन के साथ तैर रहे हैं, न कोई अपने मदार से हटता है और न आपस में टकराता है। यह क़ुरआन का अज़ीम साइंसी और रूहानी मोजिज़ाह है।
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