कुरान - 21:34 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَمَا جَعَلۡنَا لِبَشَرٖ مِّن قَبۡلِكَ ٱلۡخُلۡدَۖ أَفَإِيْن مِّتَّ فَهُمُ ٱلۡخَٰلِدُونَ

Transliteration: (Wa maa ja'alnaa libasharim min qablikal khuld; afa immitta fahumul khaalidoon)

34. और हमने आपसे पहले भी किसी इंसान को दुनिया में हमेशा की ज़िन्दगी नहीं दी [51]; तो क्या अगर आप वफ़ात पा जाएं, तो क्या वे हमेशा ज़िन्दा रहेंगे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 34 की तफ़सीर

"और हमने आपसे पहले भी किसी इंसान को दुनिया में हमेशा की ज़िन्दगी नहीं दी [51]; तो क्या अगर आप वफ़ात पा जाएं, तो क्या वे हमेशा ज़िन्दा रहेंगे?"

[51] दुनिया में दायमी ज़िन्दगी किसी के लिए नहीं

कुफ़्फ़ारे मक्का कहते थे कि जब मुहम्मद (ﷺ) का विसाल होगा तो उनका दीन ख़त्म हो जाएगा। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि दुनिया दारुल-फ़ना है, यहाँ किसी इंसान को हमेशगी हासिल नहीं:

  • तमाम अंबिया, औलिया और यहाँ तक कि हज़रत ख़िज़्र और हज़रत ईसा (अलैहिमुस्सलाम) और इबलीस भी बिल-आख़िर मौत का मज़ा चखेंगे। तवील उम्र पाना अलग बात है और हमेशा ज़िन्दा रहना अलग बात है।

  • काफ़िरों की यह उम्मीद बातिल है कि वे हमेशा रहेंगे; जब हर जान को मौत आनी है तो फिर रसूलुल्लाह (ﷺ) के विसाल की तमन्ना करना काफ़िरों की हमाक़त है।

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