Transliteration: (Wa izaa ra aakal lazeena kafarooo iny-yattakhizoonaka illa huzuwan; ahaazal lazee yazkuru aalihatakum wa hum bi zikrir Rahmaani hum kaafiroon)
"और जब काफ़िर लोग आपको देखते हैं, तो वे आपका सिर्फ़ मज़ाक़ ही उड़ाते हैं [54] कि 'क्या यही वह शख़्स है जो तुम्हारे माबूदों की बुराई करता है?' [55] हालांकि वे खुद रहमान के ज़िक्र का साफ़ इनकार करने वाले हैं [56] ।"
यह आयत अबू जहल और मक्का के मुशरिक़ीन के बारे में नाज़िल हुई जो नबी करीम (ﷺ) को देखकर हँसते और गुस्ताख़ी के साथ मज़ाक़ उड़ाया करते थे।
वे हक़ारत से कहते थे कि क्या यही हमारे बुतों पर ऐब लगाते हैं? उन्होंने बे-जान पत्थरों को इज़्ज़त दी और रब्बुल आलमीन के सबसे अफ़ज़ल रसूल की शान में गुस्ताख़ी की। अंबिया-ए-किराम की तौहीन व इस्तिहज़ा सरासर कुफ़्र है।
वे बुतों की तौहीन पर तो भड़क उठते हैं मगर खुद परवरदिगार-ए-आलम रहमान के ज़िक्र और उसकी किताब का मुसलसल इनकार करते हैं। उनका यह दोहरा मेयार उनकी बद-बातिनी और जहालत का खुला सुबूत है।
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