कुरान - 21:37 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
خُلِقَ ٱلۡإِنسَٰنُ مِنۡ عَجَلٖۚ سَأُوْرِيكُمۡ ءَايَٰتِي فَلَا تَسۡتَعۡجِلُونِ

Transliteration: (Khuliqal insaanu min 'ajal; sa ureekum Aayaatee falaa tasta'jiloon)

37. इंसान जल्दबाज़ी का पुतला बनाया गया है [57]; मैं तुम्हें अनक़रीब अपनी निशानियाँ दिखा दूंगा [58], पस तुम मुझसे जल्दी न मचाओ [59] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 37 की तफ़सीर

"इंसान जल्दबाज़ी का पुतला बनाया गया है [57]; मैं तुम्हें अनक़रीब अपनी निशानियाँ दिखा दूंगा [58], पस तुम मुझसे जल्दी न मचाओ [59] ।"

[57] इंसान की फ़ितरत में उजलत (जल्दबाज़ी)

इंसान की सरश्त में जल्दबाज़ी रखी गई है। हालांकि कुछ उमूर में जल्दी करना मुस्तहब व पसंदीदा है, जैसे:

  • गुनाह से तौबा करने में जल्दी

  • वक़्त पर नमाज़ अदा करने में जल्दी

  • कुफ़ू मिलने पर बेटी के निकाह में जल्दी

  • मय्यित की तदफ़ीन में जल्दी

लेकिन दीनी उमूर में मज़ाक़ उड़ाना और अज़ाब तलब करने में जल्दबाज़ी करना सख़्त मज़मूम (बुरा) है।

[58] निशानियात-ए-इलाही और इस्लाम का ग़लबा

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि अनक़रीब मेरी निशानियाँ सामने आ जाएंगी — चुनांचे जंगे बद्र में काफ़िरों की जिल्लत-आमेज़ शिकस्त, इस्लाम की फ़तह और मक्का का फ़तह होना इस वादे का ज़ाहिरी मोजिज़ाह बनकर सामने आया।

[59] अज़ाब की तलब में गुस्ताख़ी

यह आयत नज़र बिन हारिस और उसके साथियों के जवाब में नाज़िल हुई जो मज़ाक़ के तौर पर कहते थे कि अगर तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब लाओ जिसकी तुम हमें धमकी देते हो। अल्लाह ने फ़रमाया कि मुझसे जल्दी न मचाओ, हर काम का एक मुक़र्रर वक़्त है।

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