कुरान - 21:39 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
لَوۡ يَعۡلَمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ ٱلنَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمۡ وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ

Transliteration: (Law ya'lamul lazeena kafaroo heena laa yakuffoona 'anw wujoohihimun Naara wa laa 'an zuhoorihim wa laa hum yunsaroon)

39. काश इन काफ़िरों को उस वक़्त का इल्म होता जब वे न तो अपने चेहरों से आग को रोक सकेंगे और न अपनी पीठों से [61], और न उनकी कोई मदद की जाएगी [62]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 39 की तफ़सीर

"काश इन काफ़िरों को उस वक़्त का इल्म होता जब वे न तो अपने चेहरों से आग को रोक सकेंगे और न अपनी पीठों से [61], और न उनकी कोई मदद की जाएगी [62]!"

[61] हर तरफ़ से घेरने वाली जहन्नम की आग

क़ियामत और जहन्नम की उस होलनाकी का नक़्शा खींचा गया है जब आग काफ़िरों को आगे, पीछे, ऊपर और नीचे हर सिम्त से घेर लेगी और वे बेबस होकर हाथ-पाँव मारेंगे मगर आग को अपने से दूर न कर सकेंगे। इसके बरअक्स, मोमिनों के सजदों के निशानात और उनके सदक़ात व आंसुओं की बरकत से आग उन पर हराम कर दी जाएगी।

[62] काफ़िरों का कोई मददगार नहीं

उस दिन काफ़िरों का कोई मददगार, हामी या शफ़ीअ नहीं होगा। उनके झूठे माबूद उन्हें छोड़ देंगे और वे हमेशगी के अज़ाब में गिरफ़्तार रहेंगे।

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