Transliteration: (Kullu nafsin zaaa'iqatul mawt; wa nablookum bi sharri walkhairi fitnatanw wa ilainaa turja'oon)
"हर जान को मौत का मज़ा चखना है [52]; और हम तुम्हें बुराई और भलाई (दुख और सुख) के ज़रिये आज़माते हैं इम्तिहान के लिए; और तुम सब हमारी ही तरफ़ लौटाए जाओगे [53] ।"
मौत हर ज़िन्दा जान के लिए एक क़तई हक़ीक़त है। लेकिन मौत का ज़ायक़ा हर एक के लिए अलग होता है:
मोमिनीन व औलिया-ए-किराम के लिए: मौत महबूब से मिलने का ज़रिया और शर्बत से भी ज़ियादा शीरीं (मीठा) घूंट है।
काफ़िरों व मुजरिमों के लिए: मौत अज़ाब और तक्लीफ़ का कड़वा घूंट है।
अल्लाह तआला बंदों को सेहत व बीमारी, दौलत व फ़क़्र, और ख़ुशी व ग़म के ज़रिये आज़माता है ताकि सब्र और शुक्र का इम्तिहान हो सके। और आख़िरकार सबको अल्लाह ही के हुज़ूर पेश होना है जहाँ हर अमल का मुकम्मल बदला दिया जाएगा।
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