कुरान - 21:31 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَجَعَلۡنَا فِي ٱلۡأَرۡضِ رَوَٰسِيَ أَن تَمِيدَ بِهِمۡ وَجَعَلۡنَا فِيهَا فِجَاجٗا سُبُلٗا لَّعَلَّهُمۡ يَهۡتَدُونَ

Transliteration: (Wa ja'alnaa fil ardi rawaasiya an tameeda bihim wa ja'alnaa feehaa fijaajan subulal la'allahum yahtadoon)

31. और हमने ज़मीन में भारी पहाड़ (लंगर) रख दिए [46] ताकि वह उन्हें लेकर डगमगाए न, और हमने उसमें कुशादा रास्ते बनाए ताकि वे अपनी मंज़िलों तक पहुंच सकें। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 31 की तफ़सीर

"और हमने ज़मीन में भारी पहाड़ (लंगर) रख दिए [46] ताकि वह उन्हें लेकर डगमगाए न, और हमने उसमें कुशादा रास्ते बनाए ताकि वे अपनी मंज़िलों तक पहुंच सकें।"

[46] पहाड़: ज़मीन के मेख़ और लंगर

क़ुरआने मजीद ने पहाड़ों को 'रवासी' (लंगर व मेख़ें) क़रार दिया है। जिस तरह जहाज़ को लंगर के ज़रिये तूफ़ानी मौजों में ठहराव मिलता है, उसी तरह अल्लाह तआला ने ज़मीन पर भारी पहाड़ों का वज़न रख दिया ताकि ज़मीन की परतों में तवाज़ुन रहे और वह इंसानों को लेकर डगमगाने और ज़लज़लों से महफ़ूज़ रहे।

साथ ही पहाड़ों के दरमियान कुशादा दर्रे और रास्ते बना दिए ताकि लोग सफ़र कर सकें और अपनी ज़रूरतों तक आसानी से पहुंच सकें। यह अल्लाह की हिकमत और रहमत का मुज़ाहरा है।

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