Transliteration: (Wa Zakariyyaaa iz naadaa Rabbahoo Rabbi laa tazarnee fardanw wa Anta khairul waariseen)
"और ज़करिय्या को (याद कीजिए) जब उन्होंने अपने रब को पुकारा कि 'ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़, और तू सबसे बेहतरीन वारिस है [137]!'"
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने बुढ़ापे में बे-औलाद होने पर दुआ फ़रमाई: 'रब्बी ला तज़रनी फ़रदंव व अन्ता ख़ैरुल वारिसीन'। उनकी यह दुआ दुनियावी नाम या जायदाद के लिए न थी, बल्कि सिर्फ़ इस मक़सद के लिए थी कि उनके बाद दीने इलाही की ख़िदमत और नबुव्वत का वारिस कोई नेक बंदा बने।
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