कुरान - 21:90 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

90
فَٱسۡتَجَبۡنَا لَهُۥ وَوَهَبۡنَا لَهُۥ يَحۡيَىٰ وَأَصۡلَحۡنَا لَهُۥ زَوۡجَهُۥٓۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ يُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡخَيۡرَٰتِ وَيَدۡعُونَنَا رَغَبٗا وَرَهَبٗاۖ وَكَانُواْ لَنَا خَٰشِعِينَ

Transliteration: (Fastajabnaa lahoo wa wahabnaa lahoo Yahyaa Wa aslahnaa lahoo zawjah; innahum kaanoo yusaari'oona fil khairaati wa yad'oonanaa raghabanw wa rahabaa; wa kaanoo lanaa khaashi'een)

90. तो हमने उनकी दुआ क़ुबूल फ़रमाई और उन्हें यह्या अता फ़रमाया और उनकी बीवी को उनके लिए दुरुस्त (क़ाबिले औलाद) बना दिया [138]; बेशक ये लोग नेक कामों में जल्दी करते थे और हमें उम्मीद और ख़ौफ़ के साथ पुकारते थे, और वे हमारे हुज़ूर बड़े आजिज़ व ख़ाकसार थे [139] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 90 की तफ़सीर

"तो हमने उनकी दुआ क़ुबूल फ़रमाई और उन्हें यह्या अता फ़रमाया और उनकी बीवी को उनके लिए दुरुस्त (क़ाबिले औलाद) बना दिया [138]; बेशक ये लोग नेक कामों में जल्दी करते थे और हमें उम्मीद और ख़ौफ़ के साथ पुकारते थे, और वे हमारे हुज़ूर बड़े आजिज़ व ख़ाकसार थे [139] ।"

[138] बुढ़ापे में हज़रत यह्या (अलैहिस्सलाम) की विलादत का मोजिज़ाह

अल्लाह तआला ने हज़रत ज़करिय्या की दुआ क़बूल फ़रमाकर उनकी बांझ और बूढ़ी अहलिया को सेहतमंद और क़ाबिले औलाद बना दिया, और उन्हें हज़रत यह्या (अलैहिस्सलाम) जैसा अज़ीम नबी बेटा अता फ़रमाया।

[139] दुआ की क़बूलियत के तीन अज़ीम औसाफ़

इस आयत में उन सिफ़ात का बयान है जिनके सबब दुआएं बारगाहे इलाही में मक़बूल होती हैं:

  • नेकियों में मुसाबक़त (जल्दी करना): नेक कामों को टालने के बजाए फ़ौरन अंजाम देना।

  • रग़बत और रहबत (उम्मीद और ख़ौफ़): अल्लाह की रहमत की उम्मीद और उसके ग़ज़ब का ख़ौफ़ दिल में रखना।

  • ख़ुशूअ (आजिज़ी व इन्केसारी): अल्लाह के हुज़ूर अपने नफ़्स को बिल्कुल आजिज़ और ख़ाकसार समझना।

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