कुरान - 21:92 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

92
إِنَّ هَٰذِهِۦٓ أُمَّتُكُمۡ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ وَأَنَا۠ رَبُّكُمۡ فَٱعۡبُدُونِ

Transliteration: (Inna haaziheee ummatukum ummatanw waahidatanw wa Ana Rabbukum fa'budoon)

92. बेशक यह तुम्हारा दीन एक ही दीन है [143], और मैं ही तुम्हारा रब हूँ, पस मेरी ही इबादत करो [144] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 92 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 92 की तफ़सीर

"बेशक यह तुम्हारा दीन एक ही दीन है [143], और मैं ही तुम्हारा रब हूँ, पस मेरी ही इबादत करो [144] ।"

[143] तमाम अंबिया का दीन एक: इस्लाम

यहाँ 'उम्मत' से मुराद दीन व मिल्लत है। हज़रत आदम से लेकर हुज़ूर ख़ातमुन्नबीय्यीन (ﷺ) तक तमाम अंबिया का बुनियादी दीन एक ही था यानी दीने इस्लाम और अक़ीदा-ए-तौहीद। फ़ुरूई अहकाम अलग हो सकते हैं मगर ईमान और तौहीद में कोई फ़र्क़ नहीं।

[144] अक़ीदे के बाद इबादत

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि जब तुम्हारा रब एक ही है, तो इबादत भी सिर्फ़ उसी की करो। इससे मालूम हुआ कि आमाल की क़बूलियत के लिए सही अक़ीदा पहली शर्त है। बग़ैर ईमान के कोई अमल बारगाहे इलाही में क़ाबिले क़बूल नहीं।

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