Transliteration: (Famai ya'mal minas saalihaati wa huwa mu'minun falaa kufraana lisa'yihee wa innaa lahoo kaatiboon)
"पस जो शख़्स नेक आमाल करे जबकि वह मोमिन भी हो, तो उसकी कोशिश की कोई नाक़द्री नहीं होगी [146]; और बेशक हम उसे (आमालनामे में) लिख रहे हैं [147] ।"
इस आयते करीमा ने दो-टूक फ़ैसला कर दिया कि नेक आमाल का अजर सिर्फ़ उसी वक़्त मिलेगा जब बंदा बा-ईमान (मोमिन) हो। काफ़िर के अच्छे आमाल का बदला सिर्फ़ दुनिया में दे दिया जाता है, आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं। मोमिन का एक-एक नेक अमल क़द्र व सवाब का मुस्तहिक़ है।
फ़रिश्ते बंदों के आमाल लिखते हैं, मगर अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि 'हम उसे लिख रहे हैं'। यह मोमिनों के आमाल की अज़्मत और अल्लाह की ख़ास तवज्जोह का इज़हार है कि कोई नेकी ज़ाया न होगी।
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