कुरान - 21:91 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

91
وَٱلَّتِيٓ أَحۡصَنَتۡ فَرۡجَهَا فَنَفَخۡنَا فِيهَا مِن رُّوحِنَا وَجَعَلۡنَٰهَا وَٱبۡنَهَآ ءَايَةٗ لِّلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wallateee ahsanat farjahaa fanafakhnaa feehaa min roohinaa wa ja'alnaahaa wabnahaaa Aayatan lil'aalameen)

91. और उस (ख़ातून मरयम) को (याद कीजिए) जिन्होंने अपनी पाकदामनी की हिफ़ाज़त की [140], तो हमने अपनी रूह में से उनके अंदर फूंक दिया [141], और हमने उन्हें और उनके बेटे को तमाम जहान वालों के लिए एक अज़ीम निशानी बना दिया [142] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 91 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 91 की तफ़सीर

"और उस (ख़ातून मरयम) को (याद कीजिए) जिन्होंने अपनी पाकदामनी की हिफ़ाज़त की [140], तो हमने अपनी रूह में से उनके अंदर फूंक दिया [141], और हमने उन्हें और उनके बेटे को तमाम जहान वालों के लिए एक अज़ीम निशानी बना दिया [142] ।"

[140] हज़रत मरयम (अलैहस्सलाम) की इफ़्फ़त व पाकीज़गी

हज़रत मरयम की अज़ीम शान और पाकदामनी की गवाही क़ुरआने मजीद ने दी। वे किसी मर्द के हाथ छुए बग़ैर निहायत पाकबाज़ और इबादतगुज़ार रहीं। पाकदामनी औरत का सबसे कीमती ज़ेवर और रूहानी कमाल है।

[141] रूह का फूंका जाना

अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये हज़रत मरयम के गिरेबान में रूह फुंकवाई। अल्लाह ने इस अमल को अपनी तरफ़ मंसूब फ़रमाया जो हज़रत मरयम और हज़रत ईसा (अलैहिमुस्सलाम) की अज़ीम अज़्मत का इज़हार है।

[142] मां और बेटे: कायनात के लिए अज़ीम मोजिज़ाह

बग़ैर बाप के हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की विलादत अल्लाह की क़ुदरते कामिला की निशानी है। जिस तरह अल्लाह ने हज़रत आदम को बग़ैर मां-बाप के पैदा फ़रमाया, उसी तरह हज़रत ईसा को बग़ैर बाप के पैदा करके साबित कर दिया कि वह असबाब का पाबंद नहीं बल्कि हर चीज़ पर मुतलक़ क़ादिर है।

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