Transliteration: (Iz yureekahumul laahu fee manaamika qaleela; wa law araakahum kaseeral lafashiltum wa latanaaza'tum fil amri wa laakinnal laaha sallam; innahoo 'aleemum bizaatis sudoor)
अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ को एक सच्चे ख़्वाब में काफ़िरों की तादाद कम करके दिखा दी। यह धोखे के लिए नहीं था, बल्कि मुसलमानों के हौसले बुलंद करने के लिए था। नबियों के ख़्वाब हक़ और हक़ीक़त होते हैं, यह जंग से पहले रूहानी तैयारी थी।
अगर दुश्मनों की असल बड़ी तादाद दिखाई जाती, तो मुसलमानों में से कुछ लोग डर जाते और उनका इरादा कमज़ोर हो जाता। अल्लाह की हिकमत से उन्हें यह हालात से महफ़ूज़ रखा गया।
अगर पूरी तादाद सामने आ जाती, तो मुसलमान आपस में इख़्तिलाफ़ करने लगते — कोई आगे बढ़ने के हक़ में, कोई पीछे हटने के हक़ में। इससे उनकी इत्तेहाद और हिम्मत टूट सकती थी।
अल्लाह ने इस तरह उन्हें न सिर्फ़ दुश्मनों से, बल्कि अंदरूनी कमजोरी और फूट से भी बचा लिया। वह दिलों के हालात, ईमान, कमजोरी और हिम्मत सबको जानता है, और इन्हीं के मुताबिक़ तदबीर करता है।
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