कुरान - 8:43 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
إِذۡ يُرِيكَهُمُ ٱللَّهُ فِي مَنَامِكَ قَلِيلٗاۖ وَلَوۡ أَرَىٰكَهُمۡ كَثِيرٗا لَّفَشِلۡتُمۡ وَلَتَنَٰزَعۡتُمۡ فِي ٱلۡأَمۡرِ وَلَٰكِنَّ ٱللَّهَ سَلَّمَۚ إِنَّهُۥ عَلِيمُۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ

Transliteration: (Iz yureekahumul laahu fee manaamika qaleela; wa law araakahum kaseeral lafashiltum wa latanaaza'tum fil amri wa laakinnal laaha sallam; innahoo 'aleemum bizaatis sudoor)

ऐ हबीब नबी ﷺ! (याद करो) जब अल्लाह ने आपको ख़्वाब [95] में काफ़िरों को थोड़े दिखाया। और अगर वो आपको उनकी तादाद ज़्यादा दिखा देता, तो तुम लोग ज़रूर हिम्मत हार जाते [96] और इस मामले में आपस में झगड़ पड़ते [97], लेकिन अल्लाह ने तुम्हें बचाया [98]। बेशक वह दिलों की हालत को खूब जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 43 की तफ़्सीर

✅ [95] नबी ﷺ का सच्चा ख़्वाब

अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ को एक सच्चे ख़्वाब में काफ़िरों की तादाद कम करके दिखा दी। यह धोखे के लिए नहीं था, बल्कि मुसलमानों के हौसले बुलंद करने के लिए था। नबियों के ख़्वाब हक़ और हक़ीक़त होते हैं, यह जंग से पहले रूहानी तैयारी थी।

✅ [96] ख़ौफ़ से बचाना

अगर दुश्मनों की असल बड़ी तादाद दिखाई जाती, तो मुसलमानों में से कुछ लोग डर जाते और उनका इरादा कमज़ोर हो जाता। अल्लाह की हिकमत से उन्हें यह हालात से महफ़ूज़ रखा गया।

✅ [97] अंदरूनी झगड़े से बचाव

अगर पूरी तादाद सामने आ जाती, तो मुसलमान आपस में इख़्तिलाफ़ करने लगते — कोई आगे बढ़ने के हक़ में, कोई पीछे हटने के हक़ में। इससे उनकी इत्तेहाद और हिम्मत टूट सकती थी।

✅ [98] अल्लाह की हिफ़ाज़त और इल्म

अल्लाह ने इस तरह उन्हें न सिर्फ़ दुश्मनों से, बल्कि अंदरूनी कमजोरी और फूट से भी बचा लिया। वह दिलों के हालात, ईमान, कमजोरी और हिम्मत सबको जानता है, और इन्हीं के मुताबिक़ तदबीर करता है।

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