Transliteration: (Wa iz yureekumoohum izil taqaitum feee a'yunikum qaleelanw wa yuqallilukum feee a'yunihim liyaqdiyal laahu amran kaana maf'oolaa; wa ilal laahi turja'ul umoor)
अल्लाह ने दोनों तरफ़ एक अस्थायी तसव्वुर पैदा किया। मुसलमानों को दुश्मन की गिनती बहुत कम लगी और काफ़िरों को मुसलमानों की गिनती कम दिखाई दी। इस तरह दोनों तरफ़ से हिम्मत टूटी नहीं, और दोनों जंग के लिए तैयार हो गए। जब जंग शुरू हुई तो अल्लाह ने काफ़िरों को मुसलमान बहुत ज़्यादा नज़र आने लगे, जिससे उनके दिलों में ख़ौफ़ भर गया। यह अल्लाह की इलाही तदबीर थी।
यह सब अल्लाह के तय किए हुए प्लान का हिस्सा था ताकि इस जंग से हक़ की फ़तह और गुमराही की शिकस्त जाहिर हो जाए। यह सिर्फ़ एक जंग नहीं थी बल्कि इस्लाम की बुलंदी और कुफ़्र की रुसवाई का एलान था।
आख़िरत और दुनिया के तमाम नतीजे अल्लाह के इख़्तियार में हैं। जीत-हार न तो हथियारों और न ही तादाद पर है, बल्कि तवक्कुल अल्लाह पर है। यह आयत मुसलमानों को यह यक़ीन दिलाती है कि कामयाबी का असली सहारा अल्लाह ही है।
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