कुरान - 8:44 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَإِذۡ يُرِيكُمُوهُمۡ إِذِ ٱلۡتَقَيۡتُمۡ فِيٓ أَعۡيُنِكُمۡ قَلِيلٗا وَيُقَلِّلُكُمۡ فِيٓ أَعۡيُنِهِمۡ لِيَقۡضِيَ ٱللَّهُ أَمۡرٗا كَانَ مَفۡعُولٗاۗ وَإِلَى ٱللَّهِ تُرۡجَعُ ٱلۡأُمُورُ

Transliteration: (Wa iz yureekumoohum izil taqaitum feee a'yunikum qaleelanw wa yuqallilukum feee a'yunihim liyaqdiyal laahu amran kaana maf'oolaa; wa ilal laahi turja'ul umoor)

और जब आमने-सामने होने के वक़्त अल्लाह ने तुम्हारी निगाहों में उनको कम करके दिखाया और उनकी निगाहों में तुम्हें कम करके दिखाया [99], ताकि अल्लाह उस काम को पूरा कर दे जो होना ही था [100]। और सारे काम अल्लाह ही की तरफ़ लौटाए जाते हैं [101]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 44 की तफ़्सीर

✅ [99] नज़रों का असर और जंग की हिकमत

अल्लाह ने दोनों तरफ़ एक अस्थायी तसव्वुर पैदा किया। मुसलमानों को दुश्मन की गिनती बहुत कम लगी और काफ़िरों को मुसलमानों की गिनती कम दिखाई दी। इस तरह दोनों तरफ़ से हिम्मत टूटी नहीं, और दोनों जंग के लिए तैयार हो गए। जब जंग शुरू हुई तो अल्लाह ने काफ़िरों को मुसलमान बहुत ज़्यादा नज़र आने लगे, जिससे उनके दिलों में ख़ौफ़ भर गया। यह अल्लाह की इलाही तदबीर थी।

✅ [100] इलाही फ़ैसले की तकमील

यह सब अल्लाह के तय किए हुए प्लान का हिस्सा था ताकि इस जंग से हक़ की फ़तह और गुमराही की शिकस्त जाहिर हो जाए। यह सिर्फ़ एक जंग नहीं थी बल्कि इस्लाम की बुलंदी और कुफ़्र की रुसवाई का एलान था।

✅ [101] तमाम काम अल्लाह के सुपुर्द

आख़िरत और दुनिया के तमाम नतीजे अल्लाह के इख़्तियार में हैं। जीत-हार न तो हथियारों और न ही तादाद पर है, बल्कि तवक्कुल अल्लाह पर है। यह आयत मुसलमानों को यह यक़ीन दिलाती है कि कामयाबी का असली सहारा अल्लाह ही है।

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