कुरान - 8:73 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

73
وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بَعۡضُهُمۡ أَوۡلِيَآءُ بَعۡضٍۚ إِلَّا تَفۡعَلُوهُ تَكُن فِتۡنَةٞ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَفَسَادٞ كَبِيرٞ

Transliteration: (Wallazeena kafaroo ba'duhum awliyaaa'u ba'd; illaa taf'aloohu takun fitnatun fil ardi wa fasaadun kabeer)

और काफ़िर आपस में एक-दूसरे के दोस्त और सहायक हैं [165]। अगर तुम भी ऐसा न करोगे, तो ज़मीन में बड़ा फ़साद और बड़ी गड़बड़ी फैल जाएगी [166]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 73 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 73 की तफ़्सीर

✅ [165] कुफ़्फ़ार की आपसी दोस्ती और वारिसत का हुक्म

इस आयत में बताया गया कि काफ़िर आपस में एक-दूसरे के मददगार और साथी होते हैं। लेकिन वारिसत का हुक्म दीन की बुनियाद पर है। ईमान वाला काफ़िर का वारिस नहीं बन सकता और काफ़िर मोमिन का वारिस नहीं बन सकता। यहाँ तक कि खुद कुफ़्फ़ार के बीच भी मिल्लत और क़ौमी फ़र्क़ वारिसत में रुकावट है — जैसे कोई मुशरिक किसी ईसाई का वारिस नहीं बन सकता और एक मुल्क का काफ़िर दूसरे मुल्क के काफ़िर का वारिस नहीं बन सकता।

✅ [166] मोमिनों की एकता से फ़साद की रोकथाम

अगर मुसलमान आपस में एक-दूसरे के मददगार और सहायक न बनें, तो नतीजा यह होगा कि ज़ुल्म और दुश्मनी फैल जाएगी और ज़मीन में अमान की जगह फ़साद क़ायम होगा। यह चेतावनी है कि मुसलमानों की आपसी एकजुटता ही उनके इज़्ज़त, ताक़त और बक़ा की ज़मानत है। अगर यह टूट जाए, तो पूरी उम्मत के लिए कमज़ोरी, अशांति और तबाही का दरवाज़ा खुल जाएगा।

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