Transliteration: (Wallazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo fee sabeelil laahi wallazeena aawaw wa nasarooo ulaaa'ika humul mu'minoona haqqaa; lahum maghfiratunw wa rizqun kareem)
इस आयत में मुहाजिरीन (जो मक्का से हिजरत करके आए) और अंसार (जो मदीना में पनाह देने वाले थे) की कुर्बानी, मेहमाननवाज़ी और मदद का ज़िक्र है। अंसार ने न सिर्फ़ अपने घर खोले बल्कि अपनी दौलत तक आधी कर दी। इससे कुछ अहम बातें वाज़ेह होती हैं:
यह आयत साफ़ कर देती है कि मुहाजिरीन और अंसार दोनों ही हक़ीक़ी मोमिन हैं। उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से बख़्शिश और जन्नत की बुलंद नेमतें हैं। उनकी ईमानदारी और परहेज़गारी में शक करना कुफ़्र है। सहाबा-ए-किराम सब के सब आदिल (सच्चे और पाक) हैं। अगर किसी से कोई ग़लती हुई भी, तो अल्लाह ने उन्हें माफ़ फ़रमा दिया है।
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