कुरान - 8:74 सूरह अल-अन्फाल अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَهَاجَرُواْ وَجَٰهَدُواْ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ وَٱلَّذِينَ ءَاوَواْ وَّنَصَرُوٓاْ أُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلۡمُؤۡمِنُونَ حَقّٗاۚ لَّهُم مَّغۡفِرَةٞ وَرِزۡقٞ كَرِيمٞ

Transliteration: (Wallazeena aamanoo wa haajaroo wa jaahadoo fee sabeelil laahi wallazeena aawaw wa nasarooo ulaaa'ika humul mu'minoona haqqaa; lahum maghfiratunw wa rizqun kareem)

और जिन्होंने ईमान लाया और हिजरत की और अल्लाह की राह में जिहाद किया, और जिन्होंने पनाह दी और मदद की – वही सच्चे ईमान वाले हैं [167]। उनके लिए मग़फ़िरत और उम्दा रोज़ी है [168]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अन्फाल आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनफ़ाल – आयत 74 की तफ़्सीर

✅ [167] मुहाजिरीन और अंसार का बुलंद मक़ाम

इस आयत में मुहाजिरीन (जो मक्का से हिजरत करके आए) और अंसार (जो मदीना में पनाह देने वाले थे) की कुर्बानी, मेहमाननवाज़ी और मदद का ज़िक्र है। अंसार ने न सिर्फ़ अपने घर खोले बल्कि अपनी दौलत तक आधी कर दी। इससे कुछ अहम बातें वाज़ेह होती हैं:

  • अल्लाह के बन्दों की मदद करना हक़ीक़ी ईमान की निशानी है।
  • नेक लोगों की खिदमत करना ईमान की दलील है।
  • तमाम अंसार सच्चे मोमिन क़रार दिए गए।
  • मुहाजिरीन की मदद करना फ़ज़ीलत और नेकी है।
  • अल्लाह के नेक बन्दों से मदद माँगना शिर्क नहीं, बल्कि अंबिया की सुन्नत है — जैसे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के मददगार "नसारा" कहलाए।

✅ [168] मग़फ़िरत और उम्दा रिज़्क़ की बशारत

यह आयत साफ़ कर देती है कि मुहाजिरीन और अंसार दोनों ही हक़ीक़ी मोमिन हैं। उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से बख़्शिश और जन्नत की बुलंद नेमतें हैं। उनकी ईमानदारी और परहेज़गारी में शक करना कुफ़्र है। सहाबा-ए-किराम सब के सब आदिल (सच्चे और पाक) हैं। अगर किसी से कोई ग़लती हुई भी, तो अल्लाह ने उन्हें माफ़ फ़रमा दिया है।

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