कुरान - 29:37 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلرَّجۡفَةُ فَأَصۡبَحُواْ فِي دَارِهِمۡ جَٰثِمِينَ

Transliteration: (Fakazzaboohu fa akhazat humur rajfatu fa asbahoo fee daarihim jaasimeen)

तो उन्होंने उन्हें झुठला दिया [89], पस एक सख़्त ज़लज़ले ने उन्हें आ पकड़ा, तो वे अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए [90]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 37

"तो उन्होंने उन्हें झुठला दिया [89], पस एक सख़्त ज़लज़ले ने उन्हें आ पकड़ा, तो वे अपने घरों में औंधे पड़े के पड़े रह गए [90]।"

[89] रसूल की तकज़ीब और अज़ाब की आमद

इस आयत से साबित होता है कि अल्लाह का हलाक करने वाला अज़ाब महज़ गुनाहों की वजह से नहीं आता, बल्कि रसूल की साफ़ तकज़ीब और इंकार के बाद नाज़िल होता है। जैसा कि अल्लाह का इरशाद है: "हम उस वक़्त तक अज़ाब नहीं देते जब तक रसूल न भेज लें।" मदयन वाले जब पूरी तरह हठधर्मी पर उतर आए और हज़रत शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठला दिया, तब उन पर अज़ाब आया।

[90] ज़लज़ला और हौलनाक चीख़

उनके अज़ाब को यहाँ ज़लज़ला फ़रमाया गया जिससे वे अपने घरों में औंधे मुँह गिरकर ढेर हो गए। दूसरी जगह इसे हौलनाक चीख़ (सयहा) कहा गया है। मुफ़स्सिरीन फ़रमाते हैं कि पहले हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम की शदीद चीख़ गूंजी जिसने उनके दिलों को दहला दिया और साथ ही ज़मीन में ऐसा ज़बरदस्त ज़लज़ला आया कि उनकी इमारतें ढह गईं और वे हमेशा के लिए नेस्त-ओ-नाबूद हो गए।

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