कुरान - 29:38 सूरह अल-अनकबूत अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَعَادٗا وَثَمُودَاْ وَقَد تَّبَيَّنَ لَكُم مِّن مَّسَٰكِنِهِمۡۖ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَصَدَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّبِيلِ وَكَانُواْ مُسۡتَبۡصِرِينَ

Transliteration: (Wa 'Aadanw wa Samooda wa qad tabaiyana lakum min masaakinihim wa zaiyana lahumush Shaitaanu a'maalahum fasaddahum 'anis sabeeli wa kaanoo mustabsireen)

और आद और समूद को भी (हमने हलाक किया), और बेशक तुम्हारे लिए उनकी बस्तियाँ ज़ाहिर हो चुकी हैं [91]; और शैतान ने उनके आमाल उनकी नज़रों में ख़ुशनुमा बना दिए थे [92] और उन्हें (सीधी) राह से रोक दिया था, हालाँकि वे बड़े होशमंद (होशियार) लोग थे [93]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनकबूत आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंकबूत तफ़सीर - आयत 38

"और आद और समूद को भी (हमने हलाक किया), और बेशक तुम्हारे लिए उनकी बस्तियाँ ज़ाहिर हो चुकी हैं [91]; और शैतान ने उनके आमाल उनकी नज़रों में ख़ुशनुमा बना दिए थे [92] और उन्हें (सीधी) राह से रोक दिया था, हालाँकि वे बड़े होशमंद (होशियार) लोग थे [93]।"

[91] उजड़ी हुई बस्तियाँ इब्रत का निशान

क़ौमे आद और समूद की उजड़ी हुई बस्तियाँ और उनके खण्डहर अहले अरब के तिजारती रास्तों पर वाक़े थे जिन्हें वे शाम और यमन के सफ़र के दौरान देखा करते थे। इन खण्डहरों को देखकर इंसान को इब्रत हासिल करनी चाहिए कि दुनियावी ताक़त और आलीशान इमारतें भी अल्लाह की नाफ़रमानी के अज़ाब से नहीं बचा सकतीं।

[92] बुराई को अच्छा दिखाना शैतानी चाल

शैतान का सबसे बड़ा फ़रेब यह है कि वह गुनाह और कुफ़्र को इंसान की नज़रों में ख़ूबसूरत और पसंदीदा बना देता है, यहाँ तक कि गुनहगार अपने बुरे आमाल पर फ़ख़्र करने लगता है। शैतान ख़ुद जानता है कि बातिल बातिल है, मगर वह बंदों को गुमराह करने के लिए बुराई पर अच्छाई का मुलम्मा चढ़ा देता है।

[93] दुनियावी होशियारी और दीनी महरूमी

वे दुनियावी उमूर, तिजारत और हुनरमंदी में बड़े समझदार और होशमंद थे, मगर अफ़सोस कि उन्होंने अपनी अक़्ल का इस्तेमाल हक़ को पहचानने और उस पर चलने में नहीं किया। सच्ची अक़्लमंदी यह नहीं कि इंसान दुनिया बना ले और आख़िरत बिगाड़ ले, बल्कि हक़ीक़ी दानाई अल्लाह और उसके रसूल की फ़रमांबरदारी में है।

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