कुरान - 48:14 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَلِلَّهِ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ يَغۡفِرُ لِمَن يَشَآءُ وَيُعَذِّبُ مَن يَشَآءُۚ وَكَانَ ٱللَّهُ غَفُورٗا رَّحِيمٗا

Transliteration: (Wa lillaahii mulkus samaawaati wal ard; yaghfiru limany yashaaa'u wa yu'azzibu many yashaaa'; wa kaanal laahu Ghafoorar Raheemaa)

और अल्लाह ही के लिए है आसमानों और ज़मीन की बादशाही [35]। वह जिसे चाहे बख़्श दे और जिसे चाहे अज़ाब दे [36]। और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 14

"और अल्लाह ही के लिए है आसमानों और ज़मीन की बादशाही [35]। वह जिसे चाहे बख़्श दे और जिसे चाहे अज़ाब दे [36]। और अल्लाह बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है!"


[35] कायनात पर मुकम्मल इलाही इख़्तियार

ज़मीन और आसमान की हर चीज़ अल्लाह के क़ब्ज़े और हुक्म में है। जब अल्लाह ईमान वालों का हामी व मददगार है, तो कोई काफ़िर या दुश्मन अल्लाह की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ मुसलमानों का कुछ नहीं बिगाड़ सकता।


[36] अदल व रहमत पर आधारित बख़्शिश और अज़ाब

अल्लाह तआला का माफ़ करना या सज़ा देना इंसाफ़ और हिकमत पर आधारित है:

  • वह अपने फ़ज़ल व रहमत से तौबा करने वाले और सच्चे मोमिनों को बख़्श देता है।
  • वह अपने इंसाफ़ से सरकश, मुशरिक और मुनाफ़िक़ को सज़ा देता है।
  • अल्लाह किसी नेक मोमिन पर ज़ुल्म नहीं करता और न ही अपने वादों के ख़िलाफ़ करता है। अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब पर ग़ालिब है।

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