कुरान - 48:28 सूरह अल-फत्ह अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
هُوَ ٱلَّذِيٓ أَرۡسَلَ رَسُولَهُۥ بِٱلۡهُدَىٰ وَدِينِ ٱلۡحَقِّ لِيُظۡهِرَهُۥ عَلَى ٱلدِّينِ كُلِّهِۦۚ وَكَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدٗا

Transliteration: (Huwal lazeee arsala Rasoolahoo bilhudaa wa deenil haqqi liyuzhirahoo 'alad deeni kullih; wa kafaa billaahi Shaheeda)

वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा [86] ताकि वह उसे तमाम दीनों पर ग़ालिब कर दे [87]। और गवाही के लिए अल्लाह ही काफ़ी है [88]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फत्ह आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-फ़तह तफ़सीर - आयत 28

"वही है जिसने अपने रसूल को हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा [86] ताकि वह उसे तमाम दीनों पर ग़ालिब कर दे [87]। और गवाही के लिए अल्लाह ही काफ़ी है [88]!"


[86] रसूलुल्लाह ﷺ की रिसालत और दीन-ए-हक़

अल्लाह तआला ने अपने महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ को कुरआन मजीद की रौशन हिदायत और मुकम्मल शरीअत के साथ मबऊस फ़रमाया।


[87] तमाम धर्मों पर इस्लाम का ग़लबा

अल्लाह का वादा है कि दीन-ए-इस्लाम दलील, अक़्ल, रूहानियत और हुकूमत—हर एतबार से दुनिया के तमाम झूठे मज़ाहिब और निज़ामों पर ग़ालिब होकर रहेगा। हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम और इमाम महदी के दौर में पूरी दुनिया में सिर्फ़ इस्लाम का परचम लहराएगा।


[88] अल्लाह की गवाही

हुज़ूर ﷺ की रिसालत और सच्चाई पर ख़ुद ख़ालिक़-ए-कायनात की गवाही काफ़ी है; किसी मुनकिर के इनकार से हक़ की रौशनी कम नहीं हो सकती।

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