कुरान - 25:10 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
تَبَارَكَ ٱلَّذِيٓ إِن شَآءَ جَعَلَ لَكَ خَيۡرٗا مِّن ذَٰلِكَ جَنَّـٰتٖ تَجۡرِي مِن تَحۡتِهَا ٱلۡأَنۡهَٰرُ وَيَجۡعَل لَّكَ قُصُورَۢا

Transliteration: (Tabaarakal lazeee in shaaa'a ja'ala laka khairan min zaalika jannaatin tajree min tahtihal anhaaru wa yaj'al laka qusooraa)

बड़ा ही बा-बरकत है वह जो अगर चाहे तो आपके लिए इससे भी बेहतर चीज़ें बना दे—ऐसे बाग़ात जिनके नीचे नहरें बहती हों, और आपके लिए बड़े-बड़े महल बना दे [22]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 10

"बड़ा ही बा-बरकत है वह जो अगर चाहे तो आपके लिए इससे भी बेहतर चीज़ें बना दे—ऐसे बाग़ात जिनके नीचे नहरें बहती हों, और आपके लिए बड़े-बड़े महल बना दे [22]।"

[22] अल्लाह की क़ुदरत और नबी-ए-करीम ﷺ का फ़क़्र-ए-इख़्तियारी

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि काफ़िर जिन दुनियावी बाग़ात और ख़ज़ानों की बात करते हैं, अगर अल्लाह चाहे तो दुनिया ही में अपने हबीब ﷺ के लिए जन्नत से भी बेहतर बाग़ात और आलीशान क़स्र (महल) पेश कर दे। हदीस-ए-पाक में आता है कि अल्लाह ने हुज़ूर ﷺ के सामने मक्का के पहाड़ों को सोना बनाने की पेशकश फ़रमाई, लेकिन हुज़ूर ﷺ ने अपनी मर्जी से फ़क़्र और सादगी को पसंद फ़रमाया ताकि उम्मत के ग़रीबों के लिए तसल्ली और कामिल नमूना बनें।

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