कुरान - 25:8 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
أَوۡ يُلۡقَىٰٓ إِلَيۡهِ كَنزٌ أَوۡ تَكُونُ لَهُۥ جَنَّةٞ يَأۡكُلُ مِنۡهَاۚ وَقَالَ ٱلظَّـٰلِمُونَ إِن تَتَّبِعُونَ إِلَّا رَجُلٗا مَّسۡحُورًا

Transliteration: (Aw yulqaaa ilaihi kanzun aw takoonu lahoo jannatuny ya'kulu minhaa; wa qaalaz zaalimoona in tattabi'oona illaa rajulan mas hooraa)

या इसकी तरफ़ कोई ख़ज़ाना ही डाल दिया जाता, या इसके पास कोई ऐसा बाग़ होता जिससे यह खाता [18]!' और ज़ालिमों ने कहा, 'तुम तो बस एक ऐसे आदमी के पीछे चल रहे हो जिस पर जादू कर दिया गया है [19]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 8

"या इसकी तरफ़ कोई ख़ज़ाना डाल दिया जाता, या इसके पास कोई बाग़ होता जिससे यह खाता [18]!' और ज़ालिमों ने कहा, 'तुम तो बस एक जादूबदा आदमी के पीछे चल रहे हो [19]!'"

[18] दुनियावी माल-ओ-दौलत और बाग़ात का मुतालबा

काफ़िरों की सोच सिर्फ़ माद्दिपरस्ती (दुनियावी दौलत) तक महदूद थी। वे समझते थे कि नबी को सोने-चाँदी के ख़ज़ाने और बड़े-बड़े आलीशान बाग़ात का मालिक होना चाहिए ताकि उसे रोज़ी की तलाश न करनी पड़े। वे नबुव्वत की रूहानी अज़मत को माल व ज़र के तराज़ू में तोलते थे।

[19] 'मसहूर' (जादू किया हुआ) कहने का बोहतान

जब उनकी तमाम बेहुदा दलीलें ख़त्म हो गईं, तो उन्होंने आम लोगों को बहकाने के लिए यह शोशा छोड़ा कि (मआज़ल्लाह) इन पर जादू कर दिया गया है जिससे इनकी अक़्ल मुतास्सिर हो गई है। यह ज़ालिमों का खुला कज़ब और बोहतान था।

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