Transliteration: (Wa qaaloo maa li haazar Rasooli ya'kulut ta'aama wa yamshee fil aswaaq; law laaa unzila ilaihi malakun fa yakoona ma'ahoo nazeeraa)
"और उन्होंने कहा, 'इस रसूल को क्या हुआ कि खाना खाता है [15] और बाज़ारों में चलता-फिरता है [16]? इसके पास कोई फ़रिश्ता क्यों न उतारा गया जो साथ डराने वाला रहता [17]?'"
मुशरिकीन की जहालत थी कि वे नबी के लिए यह शर्त लगाते थे कि वह इंसान न हो, खाना न खाए और आम इंसानी हाजातों से जुदा हो। वे यह न समझ सके कि इंसानों की हिदायत और अमली नमूने के लिए रसूल का इंसानी जिन्स से होना ही रहमत और हिकमत है।
कुफ़्फ़ार कहते थे कि यह रसूल आम लोगों की तरह बाज़ार में क्यों जाता है। हुज़ूर ﷺ का बाज़ार तशरीफ़ ले जाना तवाज़ो (आजिज़ी), सादगी और उम्मत को हलाल रोज़ी कमाने व मुआमलात सिखाने की अमली तालीम थी।
काफ़िर मुतालबा करते थे कि अगर यह सच्चे रसूल हैं तो इनके साथ कोई ज़ाहिरी फ़रिश्ता क्यों नहीं आता जो इनके नबी होने की गवाही दे और लोगों को डराए। यह उनकी सरकशी और ईमान न लाने का महज़ एक बहाना था।
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