कुरान - 25:5 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
وَقَالُوٓاْ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ ٱكۡتَتَبَهَا فَهِيَ تُمۡلَىٰ عَلَيۡهِ بُكۡرَةٗ وَأَصِيلٗا

Transliteration: (Wa qaalooo asaateerul awwaleenak tatabahaa fahiya tumlaa 'alaihi bukratanw wa aseelaa)

और उन्होंने कहा, 'ये तो पहले लोगों की कहानियां (अफ़साने) हैं जिन्हें इन्होंने लिखवा लिया है, फिर वे सुबह और शाम इनको पढ़कर सुनाई जाती हैं [13]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 5

"और उन्होंने कहा, 'ये तो पहले लोगों की कहानियां हैं जिन्हें इन्होंने लिखवा लिया, फिर वे सुबह और शाम इनको पढ़कर सुनाई जाती हैं [13]।"

[13] क़ुरआन को 'असातीरुल-अव्वलीन' (प्राचीन कथाएं) कहना

काफ़िरों ने हक़ से आँखें चुराने के लिए यह बहाना गढ़ा कि यह क़ुरआन पहले ज़माने के लोगों के क़िस्से-कहानियाँ हैं जिन्हें मुहम्मद ﷺ ने किसी से लिखवा लिया है और सुबह-शाम उन्हें याद कराया जाता है। हालांकि हुज़ूर ﷺ उम्मी (किसी इंसान से न पढ़े हुए) थे, फिर भी अल्लाह ने आपको ऐसा हिकमत भरा कलाम अता फ़रमाया जो कायनात के तमाम इल्म का सरचश्मा है।

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