Transliteration: (Wa qaalooo asaateerul awwaleenak tatabahaa fahiya tumlaa 'alaihi bukratanw wa aseelaa)
"और उन्होंने कहा, 'ये तो पहले लोगों की कहानियां हैं जिन्हें इन्होंने लिखवा लिया, फिर वे सुबह और शाम इनको पढ़कर सुनाई जाती हैं [13]।"
काफ़िरों ने हक़ से आँखें चुराने के लिए यह बहाना गढ़ा कि यह क़ुरआन पहले ज़माने के लोगों के क़िस्से-कहानियाँ हैं जिन्हें मुहम्मद ﷺ ने किसी से लिखवा लिया है और सुबह-शाम उन्हें याद कराया जाता है। हालांकि हुज़ूर ﷺ उम्मी (किसी इंसान से न पढ़े हुए) थे, फिर भी अल्लाह ने आपको ऐसा हिकमत भरा कलाम अता फ़रमाया जो कायनात के तमाम इल्म का सरचश्मा है।
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