कुरान - 25:3 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
وَٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةٗ لَّا يَخۡلُقُونَ شَيۡـٔٗا وَهُمۡ يُخۡلَقُونَ وَلَا يَمۡلِكُونَ لِأَنفُسِهِمۡ ضَرّٗا وَلَا نَفۡعٗا وَلَا يَمۡلِكُونَ مَوۡتٗا وَلَا حَيَوٰةٗ وَلَا نُشُورٗا

Transliteration: (Wattakhazoo min dooniheee aalihatal laa yakhluqoona shai'anw wa hum yukhlaqoona wa laa yamlikoona li anfusihim darranw wa laa naf'anw wa laa yamlikoona mawtanw wa laa hayaatanw wa laa nushooraa)

और लोगों ने उसके सिवा ऐसे माबूद बना लिए हैं जो कोई चीज़ पैदा नहीं कर सकते बल्कि वे खुद पैदा किए जाते हैं [7], और वे खुद अपनी जानों के लिए भी न किसी नुक़सान के मालिक हैं [8] और न किसी नफ़े के; और न वे मौत का इख़्तियार रखते हैं, न ज़िन्दगी का और न (मरने के बाद) दोबारा ज़िन्दा कर के उठाने का [9]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 3

"और लोगों ने उसके सिवा ऐसे माबूद बना लिए जो पैदा कुछ नहीं करते बल्कि खुद पैदा किए जाते हैं [7], न अपनी जानों के नुक़सान व नफ़े के मालिक हैं [8]; और न मौत, न ज़िन्दगी और न दोबारा उठाने का इख़्तियार रखते हैं [9]!"

[7] बातिल माबूदों की आजिज़ी और मख़्लूक़ होना

मुशरिकीन जिन बुतों और मख़्लूक़ात की पूजा करते हैं, वे एक तिनका भी पैदा करने की क़ुदरत नहीं रखते बल्कि वे तो खुद तराशे हुए पत्थर या पैदा की हुई मख़्लूक़ हैं। जो खुद पैदा किया गया हो वह ख़ालिक़ और माबूद कैसे हो सकता है?

[8] नफ़ा और नुक़सान पर बेबसी

वे बातिल माबूद खुद अपनी ज़ात से भी किसी नुक़सान को दूर नहीं कर सकते और न कोई नफ़ा हासिल कर सकते हैं। जब वे अपनी हिफ़ाज़त पर क़ादिर नहीं तो दूसरों की क्या मदद करेंगे?

[9] हयात, मौत और नुशूर का इख़्तियार न होना

ज़िन्दगी बख़्शना, मौत देना और क़ियामत के दिन मुर्दों को क़ब्रों से दोबारा ज़िन्दा करके उठाना सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह तआला की ख़ास सिफ़ात हैं। बातिल माबूदों का इसमें रत्ती बराबर भी कोई दख़्ल नहीं।

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