कुरान - 25:6 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
قُلۡ أَنزَلَهُ ٱلَّذِي يَعۡلَمُ ٱلسِّرَّ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِۚ إِنَّهُۥ كَانَ غَفُورٗا رَّحِيمٗا

Transliteration: (Qul anzalhul lazee ya'lamus sirra fis samaawaati wal-ard; innahoo kaana Ghafoorar Raheemaa)

आप कह दीजिए, 'इसे तो उस ज़ात ने नाज़िल फ़रमाया है जो आसमानों और ज़मीन के हर पोशीदा (राज़) को जानता है [14]; बेशक वह बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 6

"आप कह दीजिए, 'इसे तो उस ज़ात ने नाज़िल फ़रमाया जो आसमानों और ज़मीन के हर पोशीदा राज़ को जानता है [14]; बेशक वह बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है।"

[14] आलिमुल-ग़ैब का कलाम और रब्बी रहमत

अल्लाह तआला ने हुज़ूर ﷺ को हुक्म दिया कि इन मुनकिरीन को फ़रमा दें: यह किसी इंसान का कलाम नहीं, बल्कि उस रब्बे-क़ादिर का कलाम है जिसके इल्म में आसमानों और ज़मीन का हर मख़फ़ी राज़ और हर पोशीदा हक़ीक़त अज़ल से मौजूद है। और अल्लाह इतना ग़फ़ूर व रहीम है कि इन नाफ़रमानों के बोहतानों के बावजूद फ़ौरन अज़ाब नहीं भेजता बल्कि तौबा की मोहलत अता फ़रमाता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now