Transliteration: (Qul anzalhul lazee ya'lamus sirra fis samaawaati wal-ard; innahoo kaana Ghafoorar Raheemaa)
"आप कह दीजिए, 'इसे तो उस ज़ात ने नाज़िल फ़रमाया जो आसमानों और ज़मीन के हर पोशीदा राज़ को जानता है [14]; बेशक वह बहुत बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है।"
अल्लाह तआला ने हुज़ूर ﷺ को हुक्म दिया कि इन मुनकिरीन को फ़रमा दें: यह किसी इंसान का कलाम नहीं, बल्कि उस रब्बे-क़ादिर का कलाम है जिसके इल्म में आसमानों और ज़मीन का हर मख़फ़ी राज़ और हर पोशीदा हक़ीक़त अज़ल से मौजूद है। और अल्लाह इतना ग़फ़ूर व रहीम है कि इन नाफ़रमानों के बोहतानों के बावजूद फ़ौरन अज़ाब नहीं भेजता बल्कि तौबा की मोहलत अता फ़रमाता है।
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