कुरान - 25:9 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
ٱنظُرۡ كَيۡفَ ضَرَبُواْ لَكَ ٱلۡأَمۡثَٰلَ فَضَلُّواْ فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ سَبِيلٗا

Transliteration: (Unzur kaifa daraboo lakal amsaala fadalloo falaa yastatee'oona sabeelaa (section 1))

(ऐ नबी!) देखिए तो सही, वे आपके लिए कैसी-कैसी मिसालें (बोहतान) घड़ रहे हैं! पस वे ऐसे गुमराह हुए हैं [20] कि अब कोई सीधा रास्ता पा ही नहीं सकते [21]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 9

"(ऐ नबी!) देखिए तो सही, वे आपके लिए कैसी मिसालें घड़ रहे हैं! पस वे ऐसे गुमराह हुए [20] कि अब कोई रास्ता पा ही नहीं सकते [21]।"

[20] हुज़ूर ﷺ की ज़ात-ए-अक़दस पर बातिल मिसालें और बोहतान

कुफ़्फ़ार कभी हुज़ूर ﷺ को जादूसर, कभी शायर, कभी मजनू और कभी जादू का शिकार कहते थे। उनकी इन मुतज़ाद बातों से खुद साबित होता था कि वे हक़ से भटक चुके हैं और बोहतान तराशी में अंधे हो चुके हैं।

[21] हिदायत के रास्ते से हमेशा के लिए महरूमी

हक़ की मुख़ालिफ़त और ज़िद में ये काफ़िर गुमराही की ऐसी दलदल में धंस चुके हैं कि अब इनके लिए हिदायत का कोई रास्ता बाक़ी नहीं बचा। जो नूर-ए-मुहम्मदी ﷺ का इंकार करे, उसे कहीं से रोशनी नहीं मिल सकती।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now