Transliteration: (Unzur kaifa daraboo lakal amsaala fadalloo falaa yastatee'oona sabeelaa (section 1))
"(ऐ नबी!) देखिए तो सही, वे आपके लिए कैसी मिसालें घड़ रहे हैं! पस वे ऐसे गुमराह हुए [20] कि अब कोई रास्ता पा ही नहीं सकते [21]।"
कुफ़्फ़ार कभी हुज़ूर ﷺ को जादूसर, कभी शायर, कभी मजनू और कभी जादू का शिकार कहते थे। उनकी इन मुतज़ाद बातों से खुद साबित होता था कि वे हक़ से भटक चुके हैं और बोहतान तराशी में अंधे हो चुके हैं।
हक़ की मुख़ालिफ़त और ज़िद में ये काफ़िर गुमराही की ऐसी दलदल में धंस चुके हैं कि अब इनके लिए हिदायत का कोई रास्ता बाक़ी नहीं बचा। जो नूर-ए-मुहम्मदी ﷺ का इंकार करे, उसे कहीं से रोशनी नहीं मिल सकती।
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