कुरान - 25:11 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
بَلۡ كَذَّبُواْ بِٱلسَّاعَةِۖ وَأَعۡتَدۡنَا لِمَن كَذَّبَ بِٱلسَّاعَةِ سَعِيرًا

Transliteration: (Bal kazzaboo bis Saa'ati wa a'tadnaa liman kazzaba bis Saa'ati sa'eeraa)

बल्कि अस्ल बात यह है कि उन्होंने क़ियामत की घड़ी को झुठला दिया है; और जो क़ियामत को झुठलाए उसके लिए हमने भड़कती हुई दहकती आग तैयार कर रखी है [23]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 11

"बल्कि अस्ल बात यह है कि उन्होंने क़ियामत को झुठला दिया; और जो क़ियामत को झुठलाए उसके लिए हमने दहकती आग तैयार कर रखी है [23]।"

[23] इंकार-ए-क़ियामत और 'सईर' (दहकती आग)

कुफ़्फ़ार के इन तमाम एतराज़ात की अस्ल जड़ यह है कि वे आख़िरत और क़ियामत के दिन अल्लाह के सामने पेश होने और हिसाब-किताब देने के मुनकिर हैं। और जो कोई क़ियामत का इंकार करे, उसके लिए अल्लाह ने 'सईर' यानी इंतिहाई भड़की हुई और दहकती हुई जहन्नम की आग तैयार कर रखी है।

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