कुरान - 25:14 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
لَّا تَدۡعُواْ ٱلۡيَوۡمَ ثُبُورٗا وَٰحِدٗا وَٱدۡعُواْ ثُبُورٗا كَثِيرٗا

Transliteration: (Laa tad'ul yawma thubooranw waahidanw wad'oo thubooran kaseeraa)

(उनसे कहा जाएगा,) 'आज एक ही मौत को न पुकारो, बल्कि बहुत सी मौतों को पुकारो [26]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 14

"(उनसे कहा जाएगा,) 'आज एक ही मौत को न पुकारो, बल्कि बहुत सी मौतों को पुकारो [26]!'"

[26] 'सुबूर' यानी दायमी हलाकत और अज़ाब

दोज़ख़ के फ़रिश्ते उन्हें ज़िल्लत और तंज़ के तौर पर कहेंगे कि आज एक मौत मांगने से तुम्हारा काम नहीं बनेगा, तुम जितनी चाहे मौतें पुकार लो तुम्हें मौत हरगिज़ नहीं आएगी। तुम्हें हमेशा इसी दर्दनाक अज़ाब में जलना और तड़पना होगा।

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