Transliteration: (Qul azaalika khairun am Jannatul khuldil latee wu'idal muttaqoon; kaanat lahum jazaaa'anw wa maseeraa)
"आप कहिए, 'क्या यह (अज़ाब) बेहतर है या हमेशा रहने वाली वह जन्नत जिसका मुत्तक़ी लोगों से वादा किया गया है? जो उनका बदला और आख़िरी ठिकाना है [27]।"
रसूलुल्लाह ﷺ को हुक्म हुआ कि इन अक़्ल के अंधों से पूछिए: क्या जहन्नम की यह तबाही और रुस्वाई बेहतर है, या वह हमेशा रहने वाली जन्नत (जन्नतुल-ख़ुल्द) बेहतर है जिसका वादा अल्लाह ने अपने परहेज़गार, बा-ईमान बन्दों से फ़रमाया है? यह सवाल काफ़िरों को उनकी अंधी ज़िद पर शर्मिंदा करने के लिए है।
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