कुरान - 25:18 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
قَالُواْ سُبۡحَٰنَكَ مَا كَانَ يَنۢبَغِي لَنَآ أَن نَّتَّخِذَ مِن دُونِكَ مِنۡ أَوۡلِيَآءَ وَلَٰكِن مَّتَّعۡتَهُمۡ وَءَابَآءَهُمۡ حَتَّىٰ نَسُواْ ٱلذِّكۡرَ وَكَانُواْ قَوۡمَۢا بُورٗا

Transliteration: (Qaaloo Subhaanaka maa kaana yanbaghee lanaaa an nattakhiza min doonika min awliyaaa'a wa laakin matta'tahum wa aabaaa'ahum hattaa nasooz zikra wa kaanoo qawman booraa)

वे अर्ज़ करेंगे, 'तू पाक है! हमारे लिए यह हरगिज़ रवा न था कि हम तेरे सिवा किसी को अपना कारसाज़ बनाते [32]; लेकिन तूने इन्हें और इनके बाप-दादा को दुनियावी सामान दिया यहाँ तक कि वे तेरी याद भूल गए [33], और वे थे ही हलाक होने वाले लोग!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 18

"वे अर्ज़ करेंगे, 'तू पाक है! हमारे लिए रवा न था कि तेरे सिवा किसी को कारसाज़ बनाते [32]; लेकिन तूने इन्हें दुनियावी सामान दिया यहाँ तक कि तेरी याद भूल गए [33], और वे थे ही हलाक होने वाले लोग!'"

[32] नेकों और फ़रिश्तों की तरफ़ से इज़हार-ए-बराअत

वे मुक़द्दस हज़रात और फ़रिश्ते अल्लाह की पाकी बयान करते हुए अर्ज़ करेंगे: ऐ बारी तआला! तू पाक है, जब हमारे लिए खुद यह जायज़ न था कि तेरे सिवा किसी को अपना माबूद व कारसाज़ बनाते, तो हम दूसरों को अपनी इबादत का हुक्म कैसे दे सकते थे? हम इनके इस शिर्क से बिल्कुल बेज़ार हैं।

[33] दुनियावी ऐयाशी में अल्लाह की याद को भुला देना

वे अर्ज़ करेंगे कि ऐ अल्लाह! तूने इन लोगों और इनके बाप-दादा को दुनिया की लंबी मोहलत, दौलत और ऐश-ओ-इशरत बख़्शी, तो ये तेरी नेमतों में मस्त होकर तेरे ज़िक्र और आख़िरत को भूल गए और हलाकत व बर्बादी के मुस्तहिक़ (क़ौम-ए-बूर) बन गए।

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