Transliteration: (Faqad kazzabookum bimaa taqooloona famaa tastatee'oona sarfanw wa laa nasraa; wa many yazlim minkum nuziqhu 'azaaban kabeeraa)
"पस तुम्हारे माबूदों ने तुम्हारी बातों में तुम्हें झुठला दिया; अब न अज़ाब टाल सकते हो न मदद पा सकते हो [34]; और जो ज़ुल्म करेगा, हम उसे बड़ा अज़ाब चखाएंगे [35]।"
अल्लाह तआला मुशरिकीन से फ़रमाएगा: देखो! जिन पर तुम नाज़ करते थे, उन्होंने ही तुम्हारे दावों को झूठा करार दे दिया। अब न तुम में यह ताक़त है कि ख़ुदा के अज़ाब को अपने सर से टाल सको, और न कोई तुम्हारी मदद करने वाला है।
क़ुरआन में 'ज़ुल्म' से मुराद शिर्क-ए-अकबर है (जैसा कि फ़रमाया: 'इन्नश-शिर्का लज़ुल्मुन अज़ीम')। जो कोई शिर्क और कुफ़्र की हालत में मरेगा, अल्लाह उसे आख़िरत में इंतिहाई दर्दनाक और बहुत बड़ा अज़ाब चखाएगा।
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