कुरान - 25:19 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
فَقَدۡ كَذَّبُوكُم بِمَا تَقُولُونَ فَمَا تَسۡتَطِيعُونَ صَرۡفٗا وَلَا نَصۡرٗاۚ وَمَن يَظۡلِم مِّنكُمۡ نُذِقۡهُ عَذَابٗا كَبِيرٗا

Transliteration: (Faqad kazzabookum bimaa taqooloona famaa tastatee'oona sarfanw wa laa nasraa; wa many yazlim minkum nuziqhu 'azaaban kabeeraa)

पस यक़ीनन उन्होंने (तुम्हारे माबूदों ने) तुम्हारी उन बातों में तुम्हें झुठला दिया जो तुम कहते थे; पस अब न तो तुम अज़ाब को टाल सकते हो और न कोई मदद पा सकते हो [34]; और तुम में से जो कोई ज़ुल्म (शिर्क) करेगा, हम उसे बहुत बड़ा अज़ाब चखाएंगे [35]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 19

"पस तुम्हारे माबूदों ने तुम्हारी बातों में तुम्हें झुठला दिया; अब न अज़ाब टाल सकते हो न मदद पा सकते हो [34]; और जो ज़ुल्म करेगा, हम उसे बड़ा अज़ाब चखाएंगे [35]।"

[34] माबूदों की तरफ़ से तकज़ीब और मुशरिकीन की लाचारी

अल्लाह तआला मुशरिकीन से फ़रमाएगा: देखो! जिन पर तुम नाज़ करते थे, उन्होंने ही तुम्हारे दावों को झूठा करार दे दिया। अब न तुम में यह ताक़त है कि ख़ुदा के अज़ाब को अपने सर से टाल सको, और न कोई तुम्हारी मदद करने वाला है।

[35] शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म और उसका भयानक अंजाम

क़ुरआन में 'ज़ुल्म' से मुराद शिर्क-ए-अकबर है (जैसा कि फ़रमाया: 'इन्नश-शिर्का लज़ुल्मुन अज़ीम')। जो कोई शिर्क और कुफ़्र की हालत में मरेगा, अल्लाह उसे आख़िरत में इंतिहाई दर्दनाक और बहुत बड़ा अज़ाब चखाएगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now