कुरान - 25:22 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
يَوۡمَ يَرَوۡنَ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةَ لَا بُشۡرَىٰ يَوۡمَئِذٖ لِّلۡمُجۡرِمِينَ وَيَقُولُونَ حِجۡرٗا مَّحۡجُورٗا

Transliteration: (Yawma yarawnal malaaa 'ikata laa bushraa Yawmaizin lil mujrimeena wa yaqooloona hijran mahjooraa)

जिस दिन वे फ़रिश्तों को देखेंगे [43], उस दिन मुजरिमों के लिए कोई ख़ुशख़बरी न होगी [44]; और वे (फ़रिश्तों की हैबत से) कहेंगे, 'पनाह हो, मुकम्मल आड़ हो [45]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 22

"जिस दिन वे फ़रिश्तों को देखेंगे [43], उस दिन मुजरिमों के लिए कोई ख़ुशख़बरी न होगी [44]; और वे कहेंगे, 'पनाह हो, मुकम्मल आड़ हो [45]!'"

[43] मौत और क़ियामत के दिन फ़रिश्तों का मुशाहिदा

काफ़िर दुनिया में फ़रिश्तों को देखने की मांग करते थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि वह दिन आ रहा है जब ये फ़रिश्तों को ज़रूर देखेंगे—यानी मौत के वक़्त जब अज़ाब के फ़रिश्ते उनकी रूहें खींचने आएंगे, या क़ियामत के दिन जब ज़बानिया (जहन्नम के दारोग़ा) उन्हें पकड़ेंगे।

[44] मुजरिमों के लिए बशारत की महरूमी

उस दिन काफ़िरों और मुजरिमों के लिए रहमत और जन्नत की कोई ख़ुशख़बरी नहीं होगी। उनके हिस्से में सिर्फ़ लानत, रुस्वाई और दर्दनाक अज़ाब होगा। ख़ुशख़बरी सिर्फ़ अहले-ईमान के लिए होगी।

[45] 'हिज्रम महजूरा' यानी पनाह और रुकावट की फ़रियाद

फ़रिश्तों के ग़ज़बनाक चेहरों और उनकी हैबतनाक सूरतों को देखकर काफ़िर अपनी पुरानी आदत के मुताबिक़ चीख़ उठेंगे: 'हिज्रम महजूरा' यानी ऐ काश! हमारे और इन फ़रिश्तों के दरमियान कोई मज़बूत दीवार और आड़ बन जाए जो हमें इनके अज़ाब से बचा ले। लेकिन उस दिन कोई आड़ उन्हें ख़ुदा के अज़ाब से नहीं बचा सकेगी।

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