कुरान - 25:24 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
أَصۡحَٰبُ ٱلۡجَنَّةِ يَوۡمَئِذٍ خَيۡرٞ مُّسۡتَقَرّٗا وَأَحۡسَنُ مَقِيلٗا

Transliteration: (As haabul jannati yawma'izin khairun mustaqar ranw wa ahsanu maqeela)

उस दिन जन्नत वाले ठिकाने के एतबार से भी सबसे बेहतर होंगे और दोपहर के आराम (क़ैलूला) के एतबार से भी सबसे ख़ूबसूरत जगह में होंगे [49]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 24

"उस दिन जन्नत वाले ठिकाने के एतबार से सबसे बेहतर होंगे और दोपहर के आराम के एतबार से सबसे ख़ूबसूरत जगह में होंगे [49]!"

[49] अहले-जन्नत का आलीशान मक़ाम और राहत-बख़्श क़ैलूला

काफ़िरों की रुस्वाई के बरअक्स, ईमान वालों को क़ियामत के दिन सबसे बेहतरीन ठिकाना और निहायत सुकून-बख़्श जगह अता होगी। हदीस-ए-पाक में आता है कि अल्लाह तआला दुनिया के आधे दिन के बराबर वक़्त में तमाम मख़्लूक़ का हिसाब मुकम्मल फ़रमा देगा, और जन्नती दोपहर के वक़्त (वक़्त-ए-क़ैलूला) जन्नत के सायों, नहरों और आलीशान महलों में अपनी जन्नती हूरों के साथ आराम फ़रमा रहे होंगे।

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