कुरान - 25:26 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
ٱلۡمُلۡكُ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡحَقُّ لِلرَّحۡمَٰنِۚ وَكَانَ يَوۡمًا عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ عَسِيرٗا

Transliteration: (Almulku Yawma'izinil haqqu lir Rahmaan; wa kaana Yawman'alal kaafireena 'aseeraa)

उस दिन सच्ची बादशाही सिर्फ़ रहमान ही की होगी; और वह दिन काफ़िरों पर बहुत ही भारी (सख़्त) होगा [52]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 26

"उस दिन सच्ची बादशाही सिर्फ़ रहमान ही की होगी; और वह दिन काफ़िरों पर बहुत ही भारी होगा [52]!"

[52] रहमान की मुतलक़ हुकूमत और काफ़िरों की शदीद मुसीबत

दुनिया में इंसान ज़ाहिरी तौर पर बादशाह और हुक्मरान बन बैठते थे, लेकिन क़ियामत के दिन हर ज़ाहिरी व बातिनी बादशाही ख़त्म हो जाएगी और सिर्फ़ अल्लाह रहमान की सच्ची और मुतलक़ हुकूमत ज़ाहिर होगी (जैसा कि फ़रमाया: 'लि-मनिल मुल्क उल-यौम, लिल्लाहिल वाहिदिल कह्हार')। मोमिनीन पर अल्लाह का फ़ज़्ल होगा, लेकिन काफ़िरों के लिए वह दिन पचास हज़ार साल के बराबर इंतिहाई सख़्त, ख़ौफ़नाक और असहनीय होगा।

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