कुरान - 25:25 सूरह अल-फुरक़ान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
وَيَوۡمَ تَشَقَّقُ ٱلسَّمَآءُ بِٱلۡغَمَٰمِ وَنُزِّلَ ٱلۡمَلَـٰٓئِكَةُ تَنزِيلًا

Transliteration: (Wa Yawma tashaqqaqus samaaa'u bilghamaami wa nuzzilal malaaa'ikatu tanzeela)

और जिस दिन आसमान बादलों के साथ फट पड़ेगा [50] और फ़रिश्ते कसरत से (लगातार) उतारे जाएंगे [51]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-फुरक़ान आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अल-फ़ुरक़ान – आयत 25

"और जिस दिन आसमान बादलों के साथ फट पड़ेगा [50] और फ़रिश्ते कसरत से उतारे जाएंगे [51]।"

[50] आसमान का बादलों से शक़ होना

क़ियामत के दिन कायनात का निज़ाम दरहम-बरहम हो जाएगा। आसमान सफ़ेद नूरानी बादलों के साथ फट पड़ेगा। यह अल्लाह तआला के जलाल और कज़ा व फ़ैसला के ज़हूर का दिन होगा।

[51] फ़रिश्तों का कसरत से नुज़ूल

सातों आसमानों के फ़रिश्ते सफ़-दर-सफ़ ज़मीन पर उतरेंगे और हश्र के मैदान में मौजूद तमाम इंसानों और जिन्नों को अपने घेरे में ले लेंगे। उनका यह नुज़ूल अल्लाह के हुक्म और अदालत-ए-इलाही के निफ़ाज़ के लिए होगा।

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